Edited By Pardeep,Updated: 11 Sep, 2026 09:12 PM

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों को गलत साबित करने तथा युवा वर्ग की ऊर्जा और उपलब्धियों की अनदेखी कर उनके भविष्य को धूमिल बताने वाले आलोचकों को‘नाराज़ फूफाओं' की संज्ञा देते हुए कहा कि ऐसे लोग तथ्य नहीं बल्कि अपने...
मुंबईः वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों को गलत साबित करने तथा युवा वर्ग की ऊर्जा और उपलब्धियों की अनदेखी कर उनके भविष्य को धूमिल बताने वाले आलोचकों को‘नाराज़ फूफाओं' की संज्ञा देते हुए कहा कि ऐसे लोग तथ्य नहीं बल्कि अपने आग्रह-दुराग्रह से प्रेरित लोग हैं।
वित्त मंत्री यहां भारत के 7वें ग्लोबल फिनटेक महोत्सव-2026 के समापन सत्र को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी युवा आबादी का लाभ कोई कल्पना नहीं बल्कि परिणामों में झलक रही वास्तविकता है, वह‘कल के कोड लिख रही है'और पुरानी सोच में अटके लोग इसे देख नहीं पा रहे हैं।
जियो वर्ल्ड सेंटर में आयोजित समापन सत्र में अपने भाषण के प्रारंभ में ही वहां उपस्थित युवा प्रतिभाओं के समूह की ओर संकेत करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, ' इस सभागार के चारों ओर नज़र डालिए-यह युवा और गतिशील प्रतिभाओं के असाधारण समूह से भरा हुआ है। इस आयोजन स्थल पर मौजूद उत्साह, जुनून और ऊर्जा को नजरअंदाज़ करना असंभव है, और मैं इसे स्वीकार करना चाहती हूं। स्पष्ट रूप से, यहां ‘जोश'हाई (आसमान में) है।'
उन्होंने कहा , ' हालांकि, भारत की युवा आबादी के विस्तार को निरंतर निराशावाद के चश्मे से देखने की कुछ टिप्पणीकारों की आदत बन गई है।' वित्त मंत्री ने कहा कि भारत वास्तविक समय में अपनी जनसांख्यिकीय लाभांश ( युवा आबादी के ऊंचे अनुपात) का अनुभव कर रहा है और प्रतिभाशाली तथा महत्वाकांक्षी लोगों से भरे इस सभागार को देख कर यह संभावना साकार होती दिखती है कि देश के युवा ' एक जीवंत, ठोस और भविष्य को आकार देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।‘
उन्होंने कहा कि इसी ऊर्जा के बल पर भारत ने यूपीआई के रूप में दुनिया के सबसे शक्तिशाली डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया है, दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत का मजबूती से खड़ा है तथा अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में नई सीमाओं को पार कर रहा है।
सीतारमण के अनुसार इसके विपरीत ' कुछ जानी-पहचानी आवाजे हैं जो नये युग की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को पिछली सदी के इंची-टेप से मापने में लगी रहती है और उनकी ओर से लगातार यह सवाल उठाये जाते रहते हैं कि क्या हमारी आर्थिक वृद्धि हमारे युवाओं की आकांक्षाओं और ऊर्जा के अनुरूप हो रही। इसी संदर्भ में उन्होंने ऐसी आवाजों के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस्तेमाल किये गये - 'नाराज फूफा' वाली लोकोक्ति का इस्तेमाल किया।
वित्त मंत्री ने कहा, ' हमारे‘नाराज़ फूफा लोग'भारत की आर्थिक गति और हमारे युवाओं की क्षमताओं पर हर समय संदेह करने का कोई-न-कोई बहाना ढूंढ लेते हैं। वे टेलीविजन स्टूडियो में बैठकर इस बात पर बहस करने में अपना समय बिताते हैं कि क्या भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश (युवा वर्ग) हमारे हाथ से निकल चुका है या वह अब एक बोझ में बदल गया है।' उन्होंने कहा,‘ऐसे लोग ठोस आँकड़ों के बजाय‘वाइबकास्टिंग'और‘फीलकास्टिंग'(अपने आग्रह-दुराग्रह को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने ) के तरीकों पर निर्भर रहते हैं।'
सीतारमण ने कहा कि ऐसे लोग बीते विषयों के उत्तर की प्रतीक्षा करते हुए बीते दौर में अटक कर रह गये हैं जबकि देश के युवा मस्तिष्क उनके इस निंदक रवैये को पीछे छोड़कर आगे बढ़ चुके हैं और उन्होंने वास्तव में इसे साकार करके दिखा दिया है।' उन्होंने कहा कि यह पीढ़ी अपनी उत्पादकता को प्रमाणित करने के लिए पुराने पैमानों की स्वीकृति का इंतज़ार नहीं कर रही है। ' वे (भारत के युवा) आने वाले कल का कोड लिख रहे हैं, स्थायी उद्यमों का निर्माण कर रहे हैं और यह साबित कर रहे हैं कि भारत का सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय लाभ कोई काल्पनिक संभावना नहीं, बल्कि एक सक्रिय और अजेय वास्तविकता है।'
उन्होंने कहा , ' इस सभागार में मौजूद लोग अवसरों का इंतज़ार नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे प्लेटफॉर्म बना रहे हैं, उद्यमों को बड़े स्तर पर विस्तार दे रहे हैं और भारत की मध्य आयु को हमारी सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त में बदल रहे हैं। यही इसका (आलोचनाओं का) उत्तर है और इसके लिए किसी और बचाव या स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है।'