Edited By Tanuja,Updated: 21 Sep, 2026 01:35 PM

चीन के हेबेई प्रांत में 70 साल से अधिक उम्र की एक महिला को मृत समझकर ठंडे ताबूत में रखा गया। अगले दिन ताबूत से आवाज आने पर परिजनों ने उसे बाहर निकाला। महिला ने आंखें खोलीं, लेकिन हालत गंभीर रही। डॉक्टरों ने इसे ‘अपैरेंट डेथ’ जैसी स्थिति से जोड़ा।
Bejing: चीन में एक बुजुर्ग महिला के साथ ऐसी घटना सामने आई, जिसने उसके परिवार के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी हैरान कर दिया। उत्तरी चीन के हेबेई प्रांत में 70 साल से अधिक उम्र की एक महिला को मृत समझकर ताबूत में रखा गया था। लेकिन अगले दिन ताबूत के भीतर से धीमी गुनगुनाने की आवाज सुनाई दी। परिजनों ने ताबूत खोला तो महिला में हलचल हो रही थी और होठों से गुनगुनाने की आवाज आ रही थी ।
रिपोर्ट के मुताबिक महिला लंबे समय से मस्तिष्क में रक्त प्रवाह से जुड़ी बीमारी से जूझ रही थी और उसे कैंसर भी था। डॉक्टरों ने जब बताया कि कैंसर का इलाज संभव नहीं रह गया है, तो परिवार उसे घर ले आया था, जहां उसकी जीवन के अंतिम समय में देखभाल की जा रही थी। 8 सितंबर को परिजनों को महिला में जीवन के कोई स्पष्ट संकेत दिखाई नहीं दिए। इसके बाद उन्होंने उसे एक ठंडे ताबूत में रख दिया, ताकि दूसरे शहरों में रह रहे परिवार के सदस्य वापस आकर अंतिम विदाई दे सकें। लेकिन अगले दिन शाम को महिला की बहू ने ताबूत के भीतर से हल्की-सी गुनगुनाने जैसी आवाज सुनी। परिवार ने तुरंत ताबूत खोला और महिला को बाहर निकाला।
रिपोर्ट के अनुसार 11 सितंबर को जब परिवार के अन्य सदस्य पहुंचे तो महिला होश में थी और अपनी आंखें खोल पा रही थी। हालांकि उसकी हालत बेहद गंभीर थी और वह खाना-पीना भी नहीं पा रही थी। इसके बाद उसी रात महिला की फिर मौत हो गई। 13 सितंबर को परिवार की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार किया गया। डॉक्टरों ने इस घटना को ‘अपैरेंट डेथ’ जैसी स्थिति से जोड़कर देखा है। इसमें शरीर की सामान्य गतिविधियां इतनी धीमी हो सकती हैं कि सांस और दिल की धड़कन जैसे जीवन के संकेत सामान्य तरीके से पहचानना बेहद मुश्किल हो जाता है।
ऐसी स्थिति में व्यक्ति गहरे अचेत अवस्था में जा सकता है और शरीर की चयापचय गतिविधियां भी काफी धीमी हो सकती हैं। इसलिए किसी व्यक्ति को मृत घोषित करने के लिए चिकित्सकीय रूप से निर्धारित मानदंडों का पालन किया जाता है। बता दें कि ग्रामीण चीन के कुछ हिस्सों में अंतिम संस्कार से पहले मृत व्यक्ति को घर पर कुछ दिनों तक रखने की परंपरा रही है। कई परिवार इसके लिए किराए के ठंडे ताबूत का इस्तेमाल करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में भी परिवार ने ताबूत के सामान्य शीतलन विकल्प का इस्तेमाल किया था, न कि अत्यधिक ठंडा करने वाली व्यवस्था का।
परिवार के एक सदस्य ने इस घटना की जानकारी इंटरनेट पर साझा की, जिसके बाद लोगों ने इसकी सत्यता पर सवाल उठाए। परिवार ने दावे का बचाव करते हुए कहा कि कोई अपने ही परिवार के सदस्य की जिंदगी और मौत से जुड़ी ऐसी कहानी क्यों गढ़ेगा। कुछ स्थानीय लोगों ने भी दावा किया कि उन्होंने गांव में इस घटना के बारे में सुना था। कुछ लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि महिला को ताबूत में रखने से पहले अस्पताल से औपचारिक मृत्यु प्रमाणपत्र लिया गया था या नहीं।