हथियार, हमले और हिल्टन की वो रात: क्या फिर चूकी अमेरिकी सुरक्षा? जानिए ट्रंप पर हुए जानलेवा हमलों का पूरा कच्चा चिट्ठा

Edited By Updated: 26 Apr, 2026 09:47 AM

weapons attacks and that night at the hilton

वाशिंगटन के हिल्टन होटल में पत्रकारों के साथ डिनर के दौरान हुई ताजा फायरिंग ने एक बार फिर पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर मौत के बेहद करीब से गुजर गए। सीक्रेट सर्विस ने भले ही उन्हें स्टेज से सुरक्षित...

Trump Dinner Firing : वाशिंगटन के हिल्टन होटल में पत्रकारों के साथ डिनर के दौरान हुई ताजा फायरिंग ने एक बार फिर पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर मौत के बेहद करीब से गुजर गए। सीक्रेट सर्विस ने भले ही उन्हें स्टेज से सुरक्षित निकाल लिया हो लेकिन सवाल हवा में तैर रहा है आखिर कब तक? यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप की सुरक्षा के अभेद्य किले में सेंध लगाने की कोशिश हुई है। अगर हम 2016 से लेकर अब तक के सफर पर नजर डालें तो ट्रंप की राजनीति जितनी विवादित रही है उनकी सुरक्षा उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी रही है।

रैलियों से लेकर गोल्फ कोर्स तक: बार-बार निशाने पर ट्रंप

ट्रंप पर हमलों की यह कहानी मार्च 2016 में लास वेगास की एक रैली से शुरू हुई थी जब मंच के पास से एक शख्स ने हथियार छीनने की कोशिश की थी। वह महज़ एक शुरुआत थी। इसके बाद की दो घटनाओं ने तो अमेरिका के सुरक्षा तंत्र की चूलें हिला दी थीं:

13 जुलाई 2024 (बटलर, पेन्सिलवेनिया): यह अमेरिकी इतिहास का वो काला दिन था जिसे कोई नहीं भूल सकता। एक चुनावी रैली के दौरान हमलावर की गोली ट्रंप के कान को छूकर निकल गई। वह सिर्फ बाल-बाल नहीं बचे थे बल्कि उस दिन मौत को मात देकर लौटे थे। उस हमले में एक दर्शक की जान गई और सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा पर वैश्विक स्तर पर सवाल उठे।

15 सितंबर 2024 (वेस्ट पाम बीच, फ्लोरिडा): अभी बटलर के घाव भरे भी नहीं थे कि ट्रंप के अपने गोल्फ क्लब के पास एक और संदिग्ध रायफल के साथ झाड़ियों में छिपा मिला। गनीमत रही कि सीक्रेट सर्विस ने उसे समय रहते दबोच लिया, वरना एक और बड़ी त्रासदी तय थी।

बढ़ता ध्रुवीकरण या सुरक्षा में लापरवाही?

विशेषज्ञों का मानना है कि इन हमलों के पीछे केवल सुरक्षा की चूक नहीं बल्कि अमेरिका में चरम पर पहुंचा राजनीतिक ध्रुवीकरण भी है। सोशल मीडिया पर जिस तरह की उग्र भाषा का इस्तेमाल हो रहा है उसने वैचारिक मतभेदों को व्यक्तिगत नफरत में बदल दिया है।
 

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