Edited By Rahul Rana,Updated: 17 Apr, 2026 11:49 PM

वर्ल्ड कप जीतने वाली कप्तान बनने से लेकर महिला क्रिकेट की सबसे बेखौफ खिलाड़ियों में शामिल होने तक, हरमनप्रीत कौर का सफर पंजाब के छोटे से शहर मोगा से शुरू हुआ। उस समय लड़कियों के लिए क्रिकेट में मौके ना के बराबर थे, इसलिए उन्होंने लड़कों के साथ ही...
(वेब डेस्क): वर्ल्ड कप जीतने वाली कप्तान बनने से लेकर महिला क्रिकेट की सबसे बेखौफ खिलाड़ियों में शामिल होने तक, हरमनप्रीत कौर का सफर पंजाब के छोटे से शहर मोगा से शुरू हुआ। उस समय लड़कियों के लिए क्रिकेट में मौके ना के बराबर थे, इसलिए उन्होंने लड़कों के साथ ही मैदान में खेलकर खुद को बड़ी ही मजबूती के साथ तैयार किया। यही अनुभव उन्हें शुरू से मजबूत और निडर बनाता गया। उनके परिवार, खासकर पिता ने हमेशा उनका साथ दिया, उन्हें मैदान तक लेकर गए और खुलकर खेलने की आज़ादी दी।
हाल ही में एक पॉडकास्ट बातचीत में आईक्यूओओ के सीईओ निपुण मार्या से बात करते हुए हरमनप्रीत ने अपने शुरुआती दिनों को याद किया। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा क्रिकेट खेलना चाहती थी। मेरे कमरे में वीरेंद्र सहवाग का पोस्टर लगा हुआ था और मैं उन्हें बहुत मानती थी। मेरे पिता भी खेलों से जुड़े हुए थे। इसलिए कह सकती हूँ कि कहीं न कहीं यह सब वहीं से आया है।"
उनके पिता हरमंदर सिंह भुल्लर, जो खुद वॉलीबॉल और बास्केटबॉल खेल का हिस्सा थे, उनके पहले कोच और सबसे बड़े सहारा बने। उन्होंने बताया, "वे मुझे मैदान लेकर जाते थे और कभी खेलने से मुझे नहीं रोका। मुझे खेल में जो करना होता था, वे हमेशा हर समय मेरे साथ खड़े रहते थे। मोगा में उस समय लड़कियाँ क्रिकेट नहीं खेलती थीं, इसलिए मैं लड़कों के साथ ही खेलती रही। मैंने सब कुछ वहीं से सीखा और खुद को पॉलिश करके बेहतर बनाया।"
इसी दौरान मैदान पर हुआ एक वाकया उनके सफर का बहुत बड़ा मोड़ साबित हुआ। उस पल को याद करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने बिल्कुल सिख लड़कों के बालों की तरह अपने बाल बाँध रखे थे। उस समय एक स्कूल के प्रिंसिपल ने मुझे खेलते हुए देखा और वे कन्फ्यूज हो गए। उन्होंने मेरे पास आकर मुझसे यह सवाल किया कि मैं लड़की हूँ या लड़का। वे थोड़ी देर मुझे खेलते हुए देखते रहे और उन्होंने यह जाना कि मुझमें कुछ खास है।"
यही से ही उनके सफर ने पहली बार सही दिशा की तरफ रुख किया। हरमनप्रीत ने बताया कि वे मेरे पिता के पास गए और कहा, "इसमें कुछ खास है, इसे आप मेरे स्कूल में लेकर आइए, मैं इसे महिलाओं के क्रिकेट के लिए सही ट्रेनिंग दिलवाऊँगा।" उन्होंने मेरे पिता से कहा कि वहाँ मुझे उचित प्रकार और व्यवस्थित कोचिंग मिलेगी।"
ज्ञान ज्योति स्कूल अकादमी से ही उनकी प्रोफेशनल ट्रेनिंग की शुरुआत हुई। उन्होंने कहा, "उससे पहले तो मैं लड़कों के साथ मैदान में शौकिया तौर पर ही खेला करती थी, लेकिन इस स्कूल से जुड़कर पहली बार मुझे सही कोचिंग मिली। वहीं, से मैंने क्रिकेट को गंभीरता से लेना शुरू किया।"