Edited By Sarita Thapa,Updated: 17 Apr, 2026 02:16 PM

सनातन धर्म में अधिक मास का बहुत खास महत्व है। यह माह भगवान विष्णु जी को बहुत प्रिय है। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में 12 महीने होते हैं, लेकिन लगभग हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है।
Adhik Maas 2026 : सनातन धर्म में अधिक मास का बहुत खास महत्व है। यह माह भगवान विष्णु जी को बहुत प्रिय है। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में 12 महीने होते हैं, लेकिन लगभग हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। अधिक मास को मलमास, पुरुषोत्तम मास के नामों से भी जाना जाता है। माना जाता है कि इस माह में पूरे विधि-विधान के साथ विष्णु जी की पूजा करने, दान और मंत्रों का उच्चारण करने से बहुत लाभ मिलता है। साथ ही मन की हर इच्छा पूरी होती है। इस माह में किसी भी शुभ या मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है। तो आइए जानते हैं इस माह की तारीख के बारे में-
अधिक माह कब से शुरू हो रहा है ?

पंचांग के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ का महीना अधिक मास होगा। 17 मई 2026, रविवार से अधिक मास शुरू होगा, जिसका समापन 15 जून को होगा। मान्यता है कि इस माह में किए गए जप, तप और दान का फल अन्य महीनों की तुलना में दस गुना अधिक मिलता है।

अधिक मास में क्या करें?
इस माह के दौरान विष्णु जी के मंत्रों का जाप करें। साथ ही विष्णु सहस्रनाम या पुरुष सूक्त का पाठ जरूर करें।
अधिक मास में अपनी क्षमता के अनुसार, गरीबों या जरूरतमंद को अनाज, जल और कपड़ों का दान करें।
इस माह में संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलकार स्नान कर लें।
अधिक मास में श्रीमद्भागवत कथा या गीता का पाठ करें या सुने।
अधिक मास में क्या न करें?
अधिक मास में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है, इसलिए कोई शुभ कार्य न करें।
इस महीने में लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें।
किसी का अपमान न करें और न ही किसी से झूठ बोलें।

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