इस भारतीय परिवार की कर्जदार निकली ब्रिटिश सरकार, 1917 में दिए 35 हजार आज कीमत करोड़ों में, दस्तावेजों में खुला राज

Edited By Updated: 24 Feb, 2026 10:12 AM

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दुनिया के बड़े हिस्से पर राज करने वाली और कभी न डूबने वाले सूरज का गौरव रखने वाली ब्रिटिश सरकार आज एक भारतीय परिवार की कर्जदार निकली है। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने इतिहास के पन्नों को पलट कर रख दिया...

नेशनल डेस्क:  दुनिया के बड़े हिस्से पर राज करने वाली और कभी न डूबने वाले सूरज का गौरव रखने वाली ब्रिटिश सरकार आज एक भारतीय परिवार की कर्जदार निकली है। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने इतिहास के पन्नों को पलट कर रख दिया है। दरअसल, करीब 109 साल पहले अंग्रेजों ने अपनी व्यवस्था चलाने के लिए सीहोर के एक बेहद रसूखदार सेठ से 35 हजार रुपये उधार लिए थे, जो आज तक नहीं चुकाए गए। अब उस खानदान की नई पीढ़ी इस ऐतिहासिक उधारी को वसूलने के लिए लंदन तक कानूनी नोटिस भेजने की तैयारी में है।

जब 'गोरी सरकार' को पड़ी रुपयों की जरूरत
यह कहानी साल 1917 की है, जब रूठिया परिवार भोपाल रियासत और सीहोर के सबसे अमीर घरानों में गिना जाता था। उस समय सेठ जुम्मालाल रूठिया का दबदबा इतना था कि अंग्रेज अफसर भी उनसे सलाह मशविरा करते थे। बताया जाता है कि भोपाल रियासत के कामकाज को पटरी पर लाने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने सेठ जुम्मालाल से 35 हजार रुपये का कर्ज लिया था। उस दौर में यह रकम आज के करोड़ों रुपयों के बराबर थी। साल 1937 में सेठ जी का देहांत हो गया और यह लेनदेन वक्त की धूल में कहीं दब गया।

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विरासत के कागजों ने खोला सालों पुराना राज
सालों तक गुमनाम रहे इस कर्ज का पता तब चला जब सेठ जुम्मालाल के पोते विवेक रूठिया ने अपने खानदानी दस्तावेजों और वसीयत की छानबीन की। इन कागजों में साफ तौर पर उस कर्ज का जिक्र है जो ब्रिटिश सरकार ने लिया था। विवेक रूठिया का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक कोई भी देश अपने पुराने वित्तीय वादों से पीछे नहीं हट सकता। उनका कहना है कि वे पूरे सबूतों के साथ ब्रिटिश सरकार को नोटिस भेजेंगे और ब्याज सहित अपनी पुश्तैनी रकम वापस मांगेंगे, जो आज की तारीख में कई करोड़ रुपये बनती है।

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कौन है यह रईस रूठिया परिवार?
सीहोर की गलियों में आज भी इस परिवार की अमीरी के किस्से मशहूर हैं। भले ही यह परिवार आज ज्यादा प्रचार में न रहता हो, लेकिन शहर की लगभग 20 से 30 फीसदी जमीन आज भी इसी खानदान के नाम दर्ज है। भोपाल, इंदौर और सीहोर में इनकी बेशुमार संपत्तियां, होटल और खेती की जमीनें हैं। हालांकि, इनके रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर का एक बड़ा हिस्सा इनकी जमीन पर बसा है, जिसे लेकर कई कानूनी विवाद भी चल रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या ब्रिटेन की सरकार एक सदी पुराने इस कर्ज को स्वीकार कर भारत के इस परिवार का बकाया चुकाती है।

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