स्कूल-कॉलेजों में ‘प्रधानी’ पर हाईकोर्ट सख्त, पंजाब सरकार को 2 महीने का अल्टीमेटम!

Edited By Updated: 23 Feb, 2026 09:14 PM

high court strict on  pradhanni  in schools and colleges

पंजाब के शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ती कथित अवैध “प्रधानी/प्रेसिडेंट” संस्कृति को लेकर दायर जनहित याचिका पर Punjab and Haryana High Court ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने पंजाब सरकार को याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए प्रतिनिधित्व...

चंडीगढ़/जालंधर : पंजाब के शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ती कथित अवैध “प्रधानी/प्रेसिडेंट” संस्कृति को लेकर दायर जनहित याचिका पर Punjab and Haryana High Court ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने पंजाब सरकार को याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए प्रतिनिधित्व (representation) पर दो माह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लेने का आदेश दिया है।

जनहित याचिका पंजाब यूथ कांग्रेस के सचिव Angad Dutta द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि राज्य के कई स्कूलों और कॉलेजों में बिना किसी वैधानिक चुनाव या प्रशासनिक अनुमति के स्वयंभू “प्रेसिडेंट/प्रधान” घोषित किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इस प्रवृति के चलते छात्रों में गुटबाजी और टकराव बढ़ रहा है,  नाबालिग छात्रों को शक्ति प्रदर्शन में शामिल किया जा रहा है। कैंपस का अनुशासन और शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है। कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि 22 दिसंबर 2025 को संबंधित अधिकारियों को विस्तृत प्रतिनिधित्व भेजा गया था, लेकिन उस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य सरकार उक्त प्रतिनिधित्व पर दो माह के भीतर कारणयुक्त (speaking) आदेश पारित करे और उसकी प्रति याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराए। सुनवाई के बाद अंगद दत्ता ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं बन सकते। यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई करता, तो अदालत की शरण लेने की जरूरत नहीं पड़ती। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निर्धारित समयसीमा के भीतर पंजाब सरकार क्या निर्णय लेती है और क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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