Edited By Anu Malhotra,Updated: 01 Feb, 2026 01:31 PM

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ रहे करोड़ों परिवारों के लिए साल 2026 का बजट उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाते हुए कैंसर के इलाज में काम आने वाली 17 प्रमुख दवाओं पर लगने वाले...
नेशनल डेस्क: कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ रहे करोड़ों परिवारों के लिए साल 2026 का बजट उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाते हुए कैंसर के इलाज में काम आने वाली 17 प्रमुख दवाओं पर लगने वाले 'बेसिक कस्टम ड्यूटी' को शून्य कर दिया है। सरकार का यह फैसला न केवल दवाओं की कीमतों को जमीन पर लाएगा, बल्कि उन मरीजों के लिए भी जीवनदान साबित होगा जो महंगे विदेशी इलाज के अभाव में दम तोड़ देते थे।
इलाज की बढ़ती लागत पर सरकार का बड़ा प्रहार
भारत में कैंसर का इलाज अक्सर मिडिल क्लास परिवारों की जमा-पूंजी खत्म कर देता है। इसका मुख्य कारण जीवन रक्षक दवाओं का विदेशों से महंगा आयात होना है। अब तक इन दवाओं पर सरकार जो सीमा शुल्क (Basic Customs Duty) वसूलती थी, उसे पूरी तरह हटा लिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब अमेरिका या जर्मनी जैसे देशों से आने वाली दवाएं बिना किसी अतिरिक्त टैक्स बोझ के भारत पहुंचेंगी। जानकारों की मानें तो इस टैक्स कटौती के बाद दवाओं के दाम सीधे तौर पर 10 से 12 प्रतिशत तक गिर सकते हैं। यानी जो दवा पहले 10,000 रुपये में मिलती थी, वह अब मरीजों को करीब 8,800 से 9,000 रुपये के आसपास उपलब्ध हो सकेगी।
क्या होती है यह ड्यूटी और क्यों हटाया गया इसे?
आमतौर पर सरकार विदेशों से आने वाली चीजों पर 'बेसिक कस्टम ड्यूटी' इसलिए लगाती है ताकि सरकारी खजाना भरे और देश की अपनी कंपनियों को सुरक्षा मिले। लेकिन कैंसर जैसी गंभीर स्थितियों को देखते हुए, मानवता और स्वास्थ्य को राजस्व से ऊपर रखा गया है। पहले इन दवाओं पर 5% से 10% तक की ड्यूटी और उस पर सोशल वेलफेयर सरचार्ज लगता था। वित्त मंत्री के इस ऐलान के बाद अब इन दवाओं पर केवल जीएसटी (GST) ही देय होगा, जिससे इनकी प्रभावी लागत काफी कम हो जाएगी।
राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति (NPRD) में शामिल कुछ प्रमुख बीमारियां
राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति (National Policy for Rare Diseases – NPRD) के तहत निम्नलिखित बीमारियों को शामिल किया गया है:
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लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर (Lysosomal Storage Disorders – LSDs)
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म्यूकोपॉलीसैकराइडोसिस (MPS) – टाइप I, II, IVA और VI
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स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA)
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ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD)
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वोलमैन डिज़ीज़
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हाइपोफॉस्फेटेसिया
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न्यूरोनल सेरॉइड लिपोफ्यूसिनोसिस
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सिस्टिक फाइब्रोसिस
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एटिपिकल हीमोलिटिक यूरमिक सिंड्रोम (aHUS)
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हेरिडिटरी एंजियोएडेमा
17 कैंसर दवाओं पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म
बजट 2026-27 की सबसे अहम स्वास्थ्य घोषणाओं में से एक है कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 विशिष्ट दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह हटाना। ये दवाएं बेहद महंगी होती हैं और कैंसर के इलाज की कुल लागत का बड़ा हिस्सा होती हैं। कस्टम ड्यूटी हटने से सरकार का उद्देश्य सीधे तौर पर कैंसर मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है, क्योंकि इलाज के दौरान कई मरीजों को अपनी जीवनभर की बचत खर्च करनी पड़ती है। इस फैसले से उन्नत और आधुनिक कैंसर उपचार अब ज्यादा लोगों की पहुंच में आ सकेगा, खासकर उन मरीजों के लिए जो आयातित दवाओं पर निर्भर हैं।
किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार का फोकस
ये कदम सरकार की उस व्यापक सोच को दर्शाते हैं, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता, सुलभ और समावेशी बनाने पर ज़ोर दिया गया है। जरूरी और जीवन रक्षक दवाओं पर शुल्क में कटौती कर बजट ने मरीजों की सबसे बड़ी चिंता—इलाज की ऊंची लागत—को सीधे संबोधित किया है।