Edited By Purnima Singh,Updated: 20 Jul, 2026 04:12 PM

भारत में हाई कोलेस्ट्रॉल को अक्सर बढ़ती उम्र, मोटापे या डायबिटीज से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)-INDIAB की एक राष्ट्रीय स्टडी ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। अध्ययन के अनुसार, देश के 87.3 प्रतिशत यानी हर 10...
नेशनल डेस्क : भारत में हाई कोलेस्ट्रॉल को अक्सर बढ़ती उम्र, मोटापे या डायबिटीज से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)-INDIAB की एक राष्ट्रीय स्टडी ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। अध्ययन के अनुसार, देश के 87.3 प्रतिशत यानी हर 10 में से लगभग 9 वयस्कों में कम से कम एक लिपिड स्तर असामान्य पाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति दिल की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा सकती है।
23 हजार लोगों का किया गया विश्लेषण
इस अध्ययन में ICMR-INDIAB सर्वे के तहत देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुने गए 23,666 वयस्कों के लिपिड प्रोफाइल का विश्लेषण किया गया। शोध में सामने आया कि डिस्लिपिडेमिया (खून में फैट का असंतुलन) से पीड़ित अधिकांश लोगों को लंबे समय तक किसी तरह के लक्षण महसूस नहीं होते, जबकि शरीर के भीतर धमनियों में फैट जमा होता रहता है। यही स्थिति आगे चलकर हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों का कारण बन सकती है।
महिलाओं और शहरी आबादी में ज्यादा खतरा मिला
स्टडी के मुताबिक पुरुषों की तुलना में महिलाओं में डिस्लिपिडेमिया अधिक पाया गया। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी आबादी ज्यादा प्रभावित रही। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि दोनों के बीच का अंतर बहुत अधिक नहीं है, जिससे संकेत मिलता है कि प्रोसेस्ड फूड, शारीरिक गतिविधियों में कमी और बैठे-बैठे काम करने जैसी जीवनशैली अब गांवों तक भी पहुंच चुकी है।
कम 'अच्छा' कोलेस्ट्रॉल सबसे बड़ी समस्या
अध्ययन के लेखक और चेन्नई स्थित डॉ. मोहन डायबिटीज स्पेशलिटीज सेंटर के चेयरमैन डॉ. वी. मोहन ने कहा कि भारतीयों में डिस्लिपिडेमिया का सबसे बड़ा कारण HDL यानी 'अच्छे' कोलेस्ट्रॉल का कम स्तर है। उन्होंने बताया कि भारतीय खान-पान में कार्बोहाइड्रेट की अधिक मात्रा ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ाती है, जिससे HDL का स्तर घट जाता है। उनके अनुसार, भारतीयों में डिस्लिपिडेमिया के लगभग 90 प्रतिशत मामलों के पीछे यही प्रमुख वजह है।
हर 3 में से दो लोगों में HDL कम
स्टडी में पाया गया कि हर तीन में से दो वयस्कों में HDL कोलेस्ट्रॉल कम था, जो सबसे आम समस्या बनकर सामने आई। इसके अलावा LDL यानी 'खराब' कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और कुल कोलेस्ट्रॉल का बढ़ा हुआ स्तर भी बड़ी संख्या में लोगों में पाया गया।
युवा और सामान्य वजन वाले लोग भी नहीं हैं सुरक्षित
रिसर्च में यह भी सामने आया कि लगभग 35.5 करोड़ भारतीय ऐसे हैं, जिनका ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर सामान्य है, वे मोटापे का शिकार भी नहीं हैं, लेकिन फिर भी उनके लिपिड स्तर असामान्य हैं। अध्ययन के अनुसार 30 से 39 वर्ष की आयु वर्ग में भी डिस्लिपिडेमिया के मामले बड़ी संख्या में मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में कोलेस्ट्रॉल असामान्य होने से भविष्य में दिल की बीमारी का खतरा काफी बढ़ जाता है।
जल्दी स्क्रीनिंग और स्वस्थ जीवनशैली पर दिया गया जोर
शोधकर्ताओं ने कहा कि यदि भारत में हृदय रोगों के बढ़ते मामलों को रोकना है तो कोलेस्ट्रॉल की जांच केवल मोटापा, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर होने पर ही नहीं, बल्कि पहले से ही शुरू करनी होगी। विशेषज्ञों ने हेल्दी डाइट, नियमित व्यायाम, सही वजन बनाए रखने और तंबाकू से दूरी बनाने की सलाह देते हुए कहा कि युवा, पतले या सामान्य रूप से स्वस्थ दिखने वाले लोगों को भी खुद को पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानना चाहिए।