Edited By Purnima Singh,Updated: 15 Jul, 2026 12:54 PM

कैंसर से जूझ रहे बच्चों का इलाज केवल स्वास्थ्य की चुनौती नहीं, बल्कि उनके परिवारों के लिए गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट भी बन जाता है। दिल्ली एम्स (AIIMS) की एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि कैंसर पीड़ित बच्चों के इलाज के दौरान बड़ी संख्या में...
नेशनल डेस्क : कैंसर से जूझ रहे बच्चों का इलाज केवल स्वास्थ्य की चुनौती नहीं, बल्कि उनके परिवारों के लिए गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट भी बन जाता है। दिल्ली एम्स (AIIMS) की एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि कैंसर पीड़ित बच्चों के इलाज के दौरान बड़ी संख्या में परिवारों को नौकरी, बचत और संपत्ति तक गंवानी पड़ रही है। कई अभिभावकों को इलाज के लिए अपने शहर से दूर जाना पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका और बच्चों की पढ़ाई दोनों प्रभावित होती हैं।
हर चौथे परिवार पर रोजगार का संकट
एम्स के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि 26.6% अभिभावकों की नौकरी बच्चे के इलाज के दौरान छूट गई। वहीं, 77.1% परिवारों को अपने शहर या कस्बे में इलाज की सुविधा नहीं मिलने के कारण दूसरे शहरों का रुख करना पड़ा, जिससे आर्थिक और सामाजिक मुश्किलें और बढ़ गईं।
जमीन-गहने बेचने तक की नौबत
अध्ययन के अनुसार, 26.8% परिवारों को इलाज का खर्च उठाने के लिए अपनी चल-अचल संपत्ति बेचनी पड़ी। इनमें 12% परिवारों ने जमीन और 9.4% ने आभूषण बेच दिए। इसके अलावा 47.4% परिवारों की पूरी बचत इलाज में खर्च हो गई, जबकि 27% अभिभावकों को रिश्तेदारों से उधार लेना पड़ा।
इलाज पर लाखों रुपये का खर्च
स्टडी में शामिल 50.9% बच्चों के इलाज पर औसतन करीब तीन लाख रुपये खर्च हुए। यह अध्ययन एम्स के डॉक्टरों ने 1,048 कैंसर पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों पर किया, जिसमें 66.4% बच्चे शहरी और 33.6% ग्रामीण क्षेत्रों से थे। वहीं, 55.7% बच्चे अस्पताल से 100 किलोमीटर से अधिक दूरी पर रहने वाले थे। यह शोध JCO Global Oncology Journal में प्रकाशित हुआ है।
विदेशों में भी चुनौती बरकरार
अध्ययन में बताया गया कि यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका में कैंसर पीड़ित बच्चों की देखभाल के लिए माता-पिता को 12 सप्ताह का बिना वेतन अवकाश मिलता है। वहीं जापान में लगभग दो-तिहाई माताओं को नौकरी छोड़नी पड़ती है या लंबी छुट्टी लेनी पड़ती है।
सरकारी योजनाएं दे रही हैं सहारा
कैंसर मरीजों के लिए आयुष्मान भारत योजना, राष्ट्रीय आरोग्य निधि और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष जैसी योजनाएं मददगार हैं। हालांकि, अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया कि दिल्ली सरकार की आरोग्य कोष योजना एम्स को फंड जारी नहीं करती, जिससे कई मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इलाज के साथ बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार, 18% बच्चों को इलाज के लिए गैर-सरकारी संस्थाओं (NGO), 4.8% को सरकारी योजनाओं और 1.5% को बीमा से सहायता मिली। राहत की बात यह है कि बच्चों में कैंसर के ठीक होने की दर 80% से अधिक है। हालांकि इलाज के दौरान 85% बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई और 3.1% बच्चे स्वस्थ होने के बाद भी दोबारा स्कूल नहीं लौट सके।