Edited By Rahul Rana,Updated: 20 Aug, 2026 01:50 PM

वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सियासी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।
नई दिल्ली: वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सियासी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी की ओर से पार्टी के सभी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के छह पैरा में से केवल शुरुआती दो पैरा गाने के फैसले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। शाह ने इस फैसले को तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि देश में अब ऐसी राजनीति नहीं चलेगी।
‘राष्ट्रहित के खिलाफ निर्णय’
अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस का वंदे मातरम् पूरा नहीं गाने का फैसला तुष्टीकरण की राजनीति और राष्ट्रहित के खिलाफ लिया गया निर्णय है। उन्होंने आरोप लगाया कि 1937 में कांग्रेस ने वंदे मातरम् को दो हिस्सों में बांटने का फैसला किया था और उस समय मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति की गई। शाह के मुताबिक, उस फैसले ने दो-राष्ट्र सिद्धांत को मजबूती दी और आगे चलकर देश के विभाजन की परिस्थितियां बनीं।
‘1937 का फैसला फिर लागू कर रही कांग्रेस’
अमित शाह ने कांग्रेस के मौजूदा फैसले को 1937 के निर्णय से जोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस आज उसी पुराने फैसले को दोबारा लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस ऐतिहासिक फैसले को सुधारने का काम किया है। उन्होंने कहा कि देश की जनता को कांग्रेस के इस फैसले के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच उठाएगी और विधानसभा में भी इसका जोरदार विरोध करेगी।
कांग्रेस का पलटवार
अमित शाह के बयान पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और कांग्रेस के लिए यह भावनात्मक मुद्दा है। वेणुगोपाल ने BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा नहीं थी, इसलिए उसके लिए वंदे मातरम् एक राजनीतिक मुद्दा हो सकता है, जबकि कांग्रेस के लिए यह भावनाओं और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा विषय है।