Edited By Ramkesh,Updated: 20 Aug, 2026 04:22 PM

ष्टाचार को लेकर सरकारे बड़े दावे करती है लेकिन गुजरात के पालिताणा स्थित सरकारी अस्पताल में भ्रष्टाचार और लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया जिसने सभी को चौंका दिया है। आरोप है कि 2.55 लाख लीटर क्षमता की भूमिगत पानी की टंकी बनाए बिना ही 50.43 लाख रुपये...
GujaratNews: भ्रष्टाचार को लेकर सरकारे बड़े दावे करती है लेकिन गुजरात के पालिताणा स्थित सरकारी अस्पताल में भ्रष्टाचार और लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया जिसने सभी को चौंका दिया है। आरोप है कि 2.55 लाख लीटर क्षमता की भूमिगत पानी की टंकी बनाए बिना ही 50.43 लाख रुपये का बिल मंजूरी के लिए भेज दिया गया। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया के औचक निरीक्षण में टंकी मौके पर नहीं मिली, जिसके बाद जांच शुरू हुई। मामले में दो वरिष्ठ इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि निर्माण कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने और पुलिस केस दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, पालिताणा अस्पताल में 2,55,000 लीटर क्षमता की अंडरग्राउंड पानी की टंकी बनाने का वर्क ऑर्डर सूरत की 'धर्मनंदन कंस्ट्रक्शन' कंपनी को दिया गया था। कंपनी ने फर्जी दस्तावेज और तस्वीरें पेश कर काम पूरा होने का दावा किया था। चौंकाने वाली बात यह रही कि प्रोजेक्ट्स इंप्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) के इंजीनियरों ने बिना मौके की जांच किए कागजों पर ही हस्ताक्षर कर 50.43 लाख रुपये का बिल गांधीनगर मुख्यालय में मंजूरी के लिए भेज दिया। जब स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल का निरीक्षण किया तो वहां न तो कोई टंकी मिली और न ही अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों को इसके निर्माण की कोई जानकारी थी।
स्वास्थ्य मंत्री जब अस्पताल का दौरा किया तो फर्जीवाड़ा का खुला हो गया। उन्होंने घटना की जांच के आदेश दिए। जांच में गड़बड़ी और फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद 18 अगस्त 2026 को सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए गए। इस मामले में PIU भावनगर ग्रामीण कार्यालय में संविदा पर तैनात नायब एक्सिक्यूटिव इंजीनियर (सिविल) मेहुल एस. दवे को तत्काल प्रभाव से सेवा से मुक्त कर दिया गया और PIU सुरेंद्रनगर में तैनात नायब एक्सिक्यूटिव इंजीनियर (सिविल) एन.वी. कालिया को भी ड्यूटी से हटाकर मूल आउटसोर्सिंग एजेंसी को वापस भेज दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को सख्त चेतानी दी। उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे के लिए आवंटित सार्वजनिक धन में किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य के अस्पतालों, PHC और CHC में चल रहे निर्माण कार्यों की निगरानी बढ़ा दी गई है और आगे भी ऐसे औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।