Edited By Rohini Oberoi,Updated: 20 Aug, 2026 11:42 AM
कैंसर के इलाज की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल हुई है। मॉडर्ना और मर्क की जॉइंट पर्सनलाइज़्ड mRNA कैंसर वैक्सीन ने स्किन कैंसर के सबसे खतरनाक रूप यानी हाई-रिस्क मेलेनोमा के लेट-स्टेज क्लिनिकल ट्रायल (Phase 3) में बेहद सकारात्मक और...
नई दिल्ली : कैंसर के इलाज की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल हुई है। मॉडर्ना और मर्क की जॉइंट पर्सनलाइज़्ड mRNA कैंसर वैक्सीन ने स्किन कैंसर के सबसे खतरनाक रूप यानी हाई-रिस्क मेलेनोमा के लेट-स्टेज क्लिनिकल ट्रायल (Phase 3) में बेहद सकारात्मक और उत्साहजनक परिणाम दिए हैं।
इस तकनीक में कैंसर सर्जरी के बाद मरीजों को दोबारा कैंसर होने या ट्यूमर के शरीर के अन्य अंगों में फैलने से रोकने के लिए यह स्पेशल वैक्सीन दी जाती है। इस वैक्सीन को सर्जरी के बाद मेलेनोमा के दोबारा होने या फैलने के जोखिम को कम करने के लिए बनाया गया है। इस वैक्सीन का परीक्षण मर्क की व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी दवा कीट्रूडा (पेम्ब्रोलिज़ुमैब) के साथ मिलाकर किया गया।
कंपनियों ने बताया कि इस इलाज ने कैंसर के दोबारा होने के जोखिम को कम करने का अपना मुख्य लक्ष्य हासिल किया और साथ ही मेलेनोमा के शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने के जोखिम को कम करने का दूसरा लक्ष्य भी पूरा किया। उम्मीद है कि इसके विस्तृत नतीजे जल्द ही होने वाली एक मेडिकल मीटिंग में पेश किए जाएंगे।

ये नतीजे mRNA कैंसर वैक्सीन के उभरते हुए क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाते हैं। इन वैक्सीन को मरीज़ के इम्यून सिस्टम को इस तरह प्रशिक्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि वे मरीज़ के ट्यूमर में पाए जाने वाले म्यूटेशन के आधार पर कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर सकें और उन पर हमला कर सकें।
वहीं संक्रमण को रोकने के लिए बनाई जाने वाली पारंपरिक वैक्सीन के विपरीत, पर्सनलाइज़्ड mRNA कैंसर वैक्सीन खास तौर पर किसी एक मरीज़ के लिए विकसित की जाती हैं। सर्जरी के ज़रिए ट्यूमर को हटाने के बाद, उसके जेनेटिक म्यूटेशन का विश्लेषण करके ऐसे टारगेट की पहचान की जा सकती है जो इम्यून सिस्टम को बची हुई कैंसर कोशिकाओं को पहचानने में मदद कर सकें।
मॉडर्ना की वैक्सीन mRNA तकनीक का इस्तेमाल करके इम्यून सिस्टम को ट्यूमर-स्पेसिफिक म्यूटेशन से जुड़ी जानकारी देती है। इसका मकसद एक ऐसा इम्यून रिस्पॉन्स पैदा करना है जो कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने या फैलने से पहले ही उन्हें पहचानकर नष्ट कर सके।
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फेज़ 3 ट्रायल में हाई-रिस्क स्टेज IIB से IV वाले मेलेनोमा के 1,137 मरीज़ों को शामिल किया गया जिनके ट्यूमर सर्जरी के ज़रिए हटा दिए गए थे। प्रतिभागियों को रैंडम तरीके से दो ग्रुप में बांटा गया। एक ग्रुप को लगभग एक साल तक कीट्रूडा के साथ पर्सनलाइज़्ड mRNA वैक्सीन दी गई और दूसरे ग्रुप को सिर्फ़ कीट्रूडा दी गई।
बता दें कि मॉडर्ना के प्रेसिडेंट स्टीफन होग ने कहा कि कंपनियां पहले से ही रेगुलेटर्स के साथ इस इलाज पर बातचीत कर रही हैं। चूंकि इस थेरेपी को 'ब्रेकथ्रू थेरेपी' का दर्जा मिला है इसलिए कंपनियों का मानना है कि रेगुलेटरी मंज़ूरी मिलने पर यह अगले साल तक उपलब्ध हो सकती है।

मॉडर्ना और मर्क के ट्रायल की सफलता का असर मेलेनोमा से कहीं आगे तक हो सकता है। अगर यह तरीका सुरक्षित और असरदार साबित होता रहा तो पर्सनलाइज़्ड mRNA कैंसर वैक्सीन 'प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी' का एक अहम हिस्सा बन सकती हैं।
रिसर्चर अब यह पता लगा रहे हैं कि क्या कई तरह के सॉलिड ट्यूमर के लिए ऐसी ही वैक्सीन बनाई जा सकती हैं। इसका बड़ा मकसद कैंसर के इलाज को ऐसी थेरेपी की ओर ले जाना है जो हर मरीज़ के ट्यूमर की खास जेनेटिक विशेषताओं के हिसाब से तैयार की गई हों।
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मॉडर्ना के लिए भी ये नतीजे एक अहम डेवलपमेंट हैं क्योंकि कंपनी COVID-19 वैक्सीन से आगे अपनी mRNA टेक्नोलॉजी का दायरा बढ़ाना चाहती है। मर्क के लिए यह कॉम्बिनेशन कैंसर के इलाज में 'कीट्रूडा' (Keytruda) की भूमिका को बढ़ा सकता है क्योंकि इस दशक के आखिर में यह दवा पेटेंट से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने वाली है।

हालांकि मैन्युफैक्चरिंग, बड़े पैमाने पर उत्पादन (स्केलेबिलिटी), कीमत और लंबे समय तक जीवित रहने के फायदों को लेकर अभी भी सवाल हैं लेकिन late-stage के सकारात्मक नतीजे पर्सनलाइज़्ड कैंसर ट्रीटमेंट और mRNA कैंसर वैक्सीन रिसर्च की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकते हैं।