Edited By Tanuja,Updated: 08 Jun, 2026 12:38 PM

न्यूज़ीलैंड में हाल के महीनों में भारतीय समुदाय के खिलाफ नस्लवादी घटनाओं, भड़काऊ नारों और विरोध प्रदर्शनों ने चिंता बढ़ाई है। हालांकि अधिकांश भारतीयों का कहना है कि दैनिक जीवन सामान्य है। यह विवाद तेजी से बढ़ती आप्रवासन दर, सांस्कृतिक पहचान और आवास...
International Desk:न्यूज़ीलैंड में भारतीय समुदाय को लेकर कई चिंताजनक घटनाएं सामने आई हैं। ऑकलैंड में "Kill All Indians" जैसे नस्लवादी ग्रैफिटी, सिख धार्मिक जुलूसों में व्यवधान और भारत-विरोधी नारों ने भारतीय समुदाय के बीच चिंता पैदा की है। ऑकलैंड के कुछ इलाकों में भारतीयों के खिलाफ आपत्तिजनक और घृणास्पद संदेश लिखे गए। इसके अलावा कुछ सिख जुलूसों के दौरान विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें प्रदर्शनकारियों ने हाका करते हुए "This is New Zealand, not India" जैसे नारे लगाए। इन घटनाओं ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छेड़ दी और भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे। हालांकि जमीनी स्तर पर रहने वाले कई भारतीयों का कहना है कि इन घटनाओं को पूरे देश की तस्वीर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार अधिकांश शहरों और समुदायों में जीवन सामान्य और शांतिपूर्ण बना हुआ है।
High protest alerts, anti-Indian demonstrations, racist graffiti saying "Kill All Indians," and attacks that have left many in New Zealand's Indian community feeling unsafe.
Yet Indians living on the ground are also urging people not to panic, saying daily life remains normal… https://t.co/rWxDJGTmh2 pic.twitter.com/UVtgILbjDR
— India First Post (@ifpost47) June 8, 2026
भारतीयों की न्यूज़ीलैंड के विकास में भूमिका
भारतीय मूल के लोग अब न्यूज़ीलैंड के सबसे तेजी से बढ़ते समुदायों में से एक हैं। भारतीय समुदाय देश का तीसरा सबसे बड़ा जातीय समूह बन चुका है। ऑकलैंड, हैमिल्टन और वेलिंगटन में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं।आईटी, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, व्यापार और परिवहन क्षेत्रों में भारतीयों की मजबूत मौजूदगी है।
हाल के वर्षों में भारत से छात्रों, कुशल कर्मचारियों और परिवार आधारित प्रवासियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यही तेज जनसंख्या वृद्धि राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय भी बनी हुई है।
कौन है डेस्टिनी चर्च और उसकी भूमिका क्या है?
Destiny Church न्यूज़ीलैंड का एक विवादास्पद धार्मिक और सामाजिक संगठन है, जिसका नेतृत्व Brian Tamaki करते हैं। आलोचकों का आरोप है कि चर्च से जुड़े कुछ कार्यकर्ता आप्रवासन, सांस्कृतिक बदलाव और राष्ट्रीय पहचान जैसे मुद्दों पर आक्रामक अभियान चलाते रहे हैं। हालांकि चर्च खुद को न्यूज़ीलैंड की संस्कृति और मूल्यों की रक्षा करने वाला संगठन बताता है।
तनाव की असली वजह क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार यह विवाद केवल नस्लीय नहीं बल्कि कई सामाजिक और आर्थिक कारणों से भी जुड़ा है। कुछ समूहों का मानना है कि बड़ी संख्या में नए प्रवासियों के आने से स्थानीय संसाधनों पर दबाव बढ़ा है। न्यूज़ीलैंड लंबे समय से महंगे मकानों और किराए की समस्या से जूझ रहा है। कुछ लोग इसके लिए आप्रवासन को जिम्मेदार ठहराते हैं, हालांकि अर्थशास्त्री इस मुद्दे को कहीं अधिक जटिल मानते हैं। कुछ राष्ट्रवादी और दक्षिणपंथी समूहों को लगता है कि तेजी से बदलती जनसंख्या संरचना देश की पारंपरिक पहचान को प्रभावित कर रही है।
ऑस्ट्रेलिया से कितना अलग है हालात?
पड़ोसी देश Australia में भी भारतीयों और अन्य एशियाई समुदायों के खिलाफ नस्लवादी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि अंतर यह है कि ऑस्ट्रेलिया में बहुसांस्कृतिक समाज का ढांचा अधिक पुराना और बड़ा है, जबकि न्यूज़ीलैंड में हाल के वर्षों में आप्रवासन वृद्धि ने बहस को अधिक तेज कर दिया है।
दोनों देशों में अधिकांश नागरिक बहुसांस्कृतिक समाज का समर्थन करते हैं, लेकिन छोटे समूहों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन और घृणास्पद घटनाएं अक्सर सुर्खियां बन जाती हैं। भारतीय समुदाय के कई नेताओं और स्थानीय निवासियों का कहना है कि नस्लवादी घटनाओं को गंभीरता से लेना जरूरी है ।