Edited By Parveen Kumar,Updated: 30 Jul, 2026 09:46 PM

संसद ने गुरुवार को 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' को मंजूरी दे दी। लोकसभा से पारित होने के एक दिन बाद राज्यसभा ने भी विपक्ष के वॉकआउट के बीच ध्वनि मत से बिल को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही विधेयक को संसद की अंतिम...
नेशनल डेस्क : संसद ने गुरुवार को 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' को मंजूरी दे दी। लोकसभा से पारित होने के एक दिन बाद राज्यसभा ने भी विपक्ष के वॉकआउट के बीच ध्वनि मत से बिल को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही विधेयक को संसद की अंतिम मंजूरी मिल गई।
सरकार ने कहा कि संशोधित कानून का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनुचित गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाना तथा छात्रों के हितों की रक्षा करना है।
विधेयक के अनुसार, पेपर लीक या सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों को कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की कैद तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना होगा। वहीं, संगठित तरीके से पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए कम से कम 7 वर्ष की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
संशोधन के तहत राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए किसी भी सेशन कोर्ट को विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट घोषित करने का अधिकार दिया गया है। इन अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार को कानून के तहत दर्ज मामलों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार भी दिया गया है।
बिल पारित होने से पहले राज्यसभा में विपक्षी दलों ने वॉकआउट किया। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग की, जिसे पीठासीन अधिकारी ने स्वीकार नहीं किया। इसके विरोध में कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दल सदन से बाहर चले गए।
विपक्ष के वॉकआउट पर राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार ने सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया, लेकिन मंत्री के जवाब के समय विपक्ष का सदन से बाहर जाना गैर-जिम्मेदाराना रवैया है।