Edited By Tanuja,Updated: 30 Jul, 2026 07:43 PM

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में बताया कि 2026 की पहली तिमाही में अमेरिका ने 414 और यूरोपीय देशों ने 174 भारतीयों को डिपोर्ट किया। सरकार ने फर्जी भर्ती एजेंटों पर कार्रवाई तेज करने, eMigrate पोर्टल के जरिए जागरूकता बढ़ाने और विदेश जाने वालों...
International Desk: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने राज्यसभा में बताया कि 1 जनवरी से 31 मार्च 2026 के बीच अमेरिका ने 414 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया। इसी अवधि में यूरोप के विभिन्न देशों से 174 भारतीयों को वापस भेजा गया। इस तरह साल 2026 की पहली तिमाही में अमेरिका और यूरोप से कुल 588 भारतीय नागरिकों को भारत लौटाया गया। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका किसी भी एक देश की तुलना में सबसे अधिक भारतीयों को डिपोर्ट करने वाला देश रहा। यूरोप में सबसे अधिक भारतीयों को ब्रिटेन (57) और साइप्रस (53) से वापस भेजा गया। इसके अलावा ग्रीस, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, स्वीडन, बेल्जियम और अन्य देशों से भी भारतीय नागरिकों को निर्वासित किया गया।
सरकार के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि अमेरिका से भारतीयों की डिपोर्टेशन लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2023 में 617, 2024 में 1,368 और 2025 में 2,025 भारतीयों को अमेरिका से वापस भेजा गया था। 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही यह संख्या 414 तक पहुंच चुकी है। विदेश मंत्री ने बताया कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को ठगने वाले अवैध एजेंटों और फर्जी भर्ती नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। शिकायत मिलने पर मामलों को संबंधित राज्य पुलिस को जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2025 तक eMigrate पोर्टल पर 3,505 गैर-पंजीकृत एजेंटों को सूचीबद्ध किया जा चुका है।
सरकार ने विदेश जाने के इच्छुक लोगों से अपील की है कि वे किसी भी नौकरी के प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी जांच करें और केवल अधिकृत भर्ती एजेंटों के माध्यम से ही विदेश जाएं। विदेश मंत्रालय समय-समय पर eMigrate पोर्टल, सोशल मीडिया और जागरूकता अभियानों के जरिए लोगों को फर्जी नौकरी और अवैध प्रवास के जोखिमों के बारे में सचेत करता रहता है। विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि विदेशों में कानूनी परेशानी में फंसे जरूरतमंद भारतीय नागरिकों को इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड (ICWF) के माध्यम से कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। वहीं, भारत लौटने वाले प्रवासियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होती है।