Edited By Rohini Oberoi,Updated: 06 Jan, 2026 10:34 AM

ब्रह्मांड की गहराइयों में तैरते विशाल पत्थर यानी एस्टेरॉयड (Asteroids) अब सिर्फ डराने वाली खगोलीय घटनाएं नहीं रह गए हैं। नई रिसर्च के अनुसार ये अंतरिक्ष में तैरते सोने, कीमती धातुओं और पानी के सबसे बड़े भंडार हो सकते हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस...
नेशनल डेस्क। ब्रह्मांड की गहराइयों में तैरते विशाल पत्थर यानी एस्टेरॉयड (Asteroids) अब सिर्फ डराने वाली खगोलीय घटनाएं नहीं रह गए हैं। नई रिसर्च के अनुसार ये अंतरिक्ष में तैरते सोने, कीमती धातुओं और पानी के सबसे बड़े भंडार हो सकते हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंसेज (ICE-CSIC) की एक ताजा स्टडी ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों और उद्योगपतियों का ध्यान इस आसमानी खजाने की ओर खींचा है।
सी-टाइप एस्टेरॉयड: क्यों हैं ये खास?
वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से सी-टाइप (C-Type) एस्टेरॉयड पर ध्यान केंद्रित किया है। अंतरिक्ष में पाए जाने वाले 75% एस्टेरॉयड इसी श्रेणी के हैं। ये कार्बन से भरपूर होते हैं। डॉ. जोसेप एम. ट्रिगो-रोड्रिग्ज के नेतृत्व में हुई इस रिसर्च में पाया गया कि इन एस्टेरॉयड में भविष्य की जरूरतों के लिए कच्चा माल प्रचुर मात्रा में मौजूद है। यह अध्ययन 2 जनवरी को प्रतिष्ठित जर्नल 'मंथली नोटिसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी' में प्रकाशित हुआ है।
पानी: अंतरिक्ष का 'असली सोना'
हैरानी की बात यह है कि वैज्ञानिक एस्टेरॉयड पर सोने से ज्यादा पानी को महत्व दे रहे हैं।
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रॉकेट फ्यूल: एस्टेरॉयड से मिलने वाले पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़कर रॉकेट का ईंधन बनाया जा सकता है।
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आत्मनिर्भर स्पेस मिशन: यदि अंतरिक्ष में ही पानी और ईंधन मिल जाए, तो धरती से भारी सप्लाई ले जाने की जरूरत नहीं होगी। इससे मंगल और उससे आगे की यात्रा आसान हो जाएगी।
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खेती और जीवन: गहरे अंतरिक्ष में मानव बस्तियां बसाने के लिए यह पानी पीने और खेती के काम भी आएगा।
चुनौतियां: खुदाई इतनी आसान नहीं
भले ही एस्टेरॉयड में दौलत छिपी है लेकिन उसे निकालना फिलहाल एक बड़ी चुनौती है:
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लो-ग्रेविटी (कम गुरुत्वाकर्षण): शून्य या बहुत कम गुरुत्वाकर्षण में खुदाई करना और मटेरियल को इकट्ठा करना बेहद जटिल काम है। इसके लिए नई रोबोटिक तकनीक की जरूरत है।
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पर्यावरणीय प्रभाव: अंतरिक्ष में माइनिंग से निकलने वाला कचरा (Debris) अन्य उपग्रहों और मिशनों के लिए खतरा बन सकता है।
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भारी निवेश: फिलहाल यह तकनीक विकसित करना बहुत महंगा है हालांकि लॉन्ग-टर्म में यह बेहद मुनाफे वाला सौदा होगा।
सुरक्षा और संपदा: एक तीर से दो निशाने
स्पेस माइनिंग का एक बड़ा फायदा धरती की सुरक्षा भी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि माइनिंग के बहाने हम उन खतरनाक एस्टेरॉयड को छोटा या नष्ट कर सकते हैं जो भविष्य में धरती से टकरा सकते हैं। इस तरह स्पेस डिफेंस और माइनिंग एक साथ मिलकर काम कर सकते हैं।
सैंपल-रिटर्न मिशन की बढ़ती मांग
एस्टेरॉयड माइनिंग को हकीकत बनाने के लिए अब सैंपल-रिटर्न मिशन (नमूना वापस लाने वाले मिशन) पर जोर दिया जा रहा है। नासा (NASA) और जाक्सा (JAXA) ने पहले ही एस्टेरॉयड के टुकड़े धरती पर लाने में सफलता पाई है। चीन का तियानवेन-2 (Tianwen-2) मिशन भी जल्द ही अंतरिक्ष के रहस्यों को सुलझाने के लिए रवाना होने वाला है।