सोने से पहले देखतें हैं मोबाइल तो हो जाएं Alert, स्क्रीन की ब्लू लाइट छीन रही है चैन की नींद, आज ही छोड़ दें वरना...

Edited By Updated: 07 Jun, 2026 08:49 AM

blue light from screens can make you insomniac

आज के दौर में बिस्तर पर जाने के बाद कुछ मिनट या घंटों तक मोबाइल स्क्रॉल करना, सोशल मीडिया देखना या रील्स स्क्रॉल करना ज्यादातर लोगों की आदत बन चुकी है। दिनभर की भागदौड़ के बाद लोग अक्सर रात को ही फ्री होते हैं इसलिए चैटिंग या फिल्में देखने में वक्त...

Smartphone Side Effects Before Sleep : आज के दौर में बिस्तर पर जाने के बाद कुछ मिनट या घंटों तक मोबाइल स्क्रॉल करना, सोशल मीडिया देखना या रील्स स्क्रॉल करना ज्यादातर लोगों की आदत बन चुकी है। दिनभर की भागदौड़ के बाद लोग अक्सर रात को ही फ्री होते हैं इसलिए चैटिंग या फिल्में देखने में वक्त बिताते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह छोटी सी आदत आपकी नींद और सेहत दोनों को पूरी तरह तबाह कर रही है? 

कई वैज्ञानिक शोधों (Researches) में यह साबित हो चुका है कि रात के समय मोबाइल की स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी हमारे शरीर और दिमाग को बहुत गहरा नुकसान पहुंचाती है। मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप की स्क्रीन से एक खास तरह की ब्लू लाइट (नीली रोशनी) निकलती है। यह रोशनी हमारे शरीर में मेलाटोनिन (Melatonin) हार्मोन के बनने की प्रक्रिया को रोक देती है। यह हमारे शरीर का वो नेचुरल हार्मोन है जो दिमाग को संकेत देता है कि अब रात हो गई है और सोने का समय आ चुका है। जब यह हार्मोन नहीं बनता तो हमारा दिमाग भ्रमित हो जाता है और उसे लगता है कि अभी दिन ही चल रहा है।

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रात में मोबाइल चलाने से होने वाले बड़े नुकसान

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    नींद न आना और इंसोम्निया का खतरा: देर रात तक स्क्रीन देखने से दिमाग लगातार एक्टिव (चालू) रहता है। इससे जल्दी नींद नहीं आती और रात में बार-बार नींद टूटने की समस्या होने लगती है। लगातार ऐसा होने पर व्यक्ति इंसोम्निया (अनिद्रा की बीमारी) का शिकार हो सकता है।

    सुबह उठते ही थकान और सुस्ती: अगर रात की नींद पूरी नहीं होगी तो सुबह उठने के बाद भी शरीर थका-थका रहेगा। दिनभर सुस्ती, कमजोरी महसूस होना और किसी भी काम में मन न लगना इसके खतरनाक लक्षण हैं।

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    आंखों में सूखापन और सिरदर्द: अंधेरे में लगातार स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखने से आंखों की नसों पर भारी दबाव पड़ता है। इससे आंखों में जलन, सूखापन (Dry Eyes), धुंधला दिखना और वक्त से पहले चश्मा लगने की नौबत आ जाती है।

    मानसिक तनाव और बेचैनी: सोने से ठीक पहले सोशल मीडिया स्क्रॉल करने या लगातार आने वाले नोटिफिकेशन्स को देखने से दिमाग को शांति नहीं मिल पाती। इससे स्ट्रेस (तनाव), एंग्जायटी (चिंता) और रात को सोते समय बेचैनी बढ़ती है जिससे लोगों में चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स होने लगते हैं।

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    ऐसे पाएं इस लत से छुटकारा

    अपनी सेहत को बचाने के लिए लाइफस्टाइल में ये छोटे बदलाव तुरंत करें। रात को सोने के समय से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दें। सोने जाते समय फोन को खुद से दूर या दूसरे कमरे में रखें। अलार्म के लिए मोबाइल की जगह डिजिटल या पुरानी घड़ी का इस्तेमाल करें। बिस्तर पर मोबाइल ले जाने के बजाय कोई अच्छी किताब या मैगजीन पढ़ने की आदत डालें। इससे दिमाग शांत होता है और नींद बहुत गहरी आती है।

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