Three Language Policy पर घमासान... सुप्रीम कोर्ट में CBSE का बड़ा दावा, 47% स्कूल पहले से कर रहे पालन

Edited By Updated: 14 Jul, 2026 12:17 PM

cbse defends three language policy in supreme court

सुप्रीम कोर्ट में तीन-भाषा नीति का बचाव करते हुए, सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने सोमवार को कहा कि बोर्ड से जुड़े 28,848 स्कूलों में से 47.3% स्कूल पहले से ही 9वीं कक्षा के छात्रों को दो या उससे ज़्यादा भारतीय भाषाएँ पढ़ाते हैं ...

नेशनल डेस्क : सुप्रीम कोर्ट में तीन-भाषा नीति का बचाव करते हुए, सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने सोमवार को कहा कि बोर्ड से जुड़े 28,848 स्कूलों में से 47.3% स्कूल पहले से ही 9वीं कक्षा के छात्रों को दो या उससे ज़्यादा भारतीय भाषाएँ पढ़ाते हैं। इसलिए, वे बिना किसी अतिरिक्त टीचर के 'थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी' (तीन भाषाओं वाली नीति) का पूरी तरह पालन कर रहे हैं, जबकि 99.19% स्कूलों में कम से कम एक भारतीय भाषा का टीचर है।

CBSE, शिक्षा मंत्रालय और NCERT ने दाखिल किए हलफनामे
CBSE द्वारा दाखिल जवाबी हलफनामे और शिक्षा मंत्रालय व NCERT के अलग-अलग हलफनामों में ये आंकड़े सामने आए हैं। ये हलफनामे माता-पिता और विदेशी भाषा के टीचरों द्वारा दायर मुकदमे के जवाब में बोर्ड की तरफ से इस नीति के बचाव में पेश किए गए हैं।

CBSE ने कहा, "यह मानते हुए कि अलग-अलग भारतीय भाषाओं में पूरी टीचिंग क्षमता विकसित करने के लिए स्कूलों को समय की आवश्यकता हो सकती है, बोर्ड ने अंतरिम उपाय के रूप में लचीली स्टाफिंग व्यवस्था की अनुमति दी है।"

15 मई के सर्कुलर को दी गई है चुनौती
दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और चेन्नई के माता-पिता और टीचरों द्वारा दायर याचिका में CBSE के 15 मई के उस सर्कुलर को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई, 2026 से कक्षा 9 में तीन भाषाएं अनिवार्य कर दी गई हैं। सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई करेगा।

याचिका में क्या कहा गया है?
याचिका में तर्क दिया गया है कि सर्कुलर असंवैधानिक और मनमाना है तथा यह संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 21A का उल्लंघन करता है। इसमें आरोप लगाया गया है कि इसने ठीक 36 दिन पहले जारी CBSE के उस नोटिफिकेशन को अचानक पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि "कक्षा 9 के स्तर पर शैक्षणिक सत्र 2029-30 तक R3 (तीसरी भाषा) लागू नहीं होगी।"

टेक्स्टबुक्स और शिक्षकों को लेकर भी उठे सवाल
याचिका में यह भी कहा गया है कि स्कूलों से बिना पाठ्यपुस्तकों, टीचरों या बोर्ड के मूल्यांकन ढांचे के इस नीति को लागू करने के लिए कहा जा रहा है, जिससे छात्रों को कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है और स्कूलों को तीसरी भाषा पढ़ाने के लिए केवल "कामकाजी दक्षता" (Functional Proficiency) वाले अन्य विषयों के टीचरों को तैनात करने की अनुमति दी जा रही है।

CBSE ने याचिका को बताया अप्रासंगिक
CBSE ने तर्क दिया कि बाद की घटनाओं के कारण यह याचिका अब अप्रासंगिक हो गई है। उसने अदालत को बताया कि 29 जून के कार्यान्वयन दिशानिर्देशों और 10 जुलाई के स्पष्टीकरण सर्कुलर ने याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाई गई शिकायतों का समाधान कर दिया है, जिससे मांगी गई मुख्य राहतें "अनावश्यक और निष्फल" हो गई हैं।

तीन-भाषा नीति में क्या है प्रावधान?
तीन-भाषा नीति के तहत, कक्षा 9 के छात्र अब तीन भाषाएं पढ़ेंगे, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी। हालांकि, एक बार की छूट के तौर पर, दो गैर-मूल भाषाएं (उदाहरण के लिए अंग्रेजी और फ्रेंच) पढ़ने वाले छात्र किसी एक को चुन सकते हैं।

विदेशी भाषाओं पर रोक नहीं : CBSE
बोर्ड ने इस चुनौती के मुख्य आधार पर भी आपत्ति जताई कि स्कूलों से विदेशी भाषाओं को हटाया जा रहा है। हलफनामे में कहा गया है, "विदेशी भाषा पढ़ने पर कोई रोक नहीं है।" इसमें आगे कहा गया है कि विदेशी भाषा को तीन भाषाओं में से एक के तौर पर या चौथी अतिरिक्त भाषा के तौर पर पढ़ाया जा सकता है। बोर्ड का तर्क है कि याचिका में विदेशी भाषाओं को कुछ शर्तों के साथ बनाए रखने की व्यवस्था को गलत तरीके से 'खत्म करना' बताया गया है।

NCERT ने शुरू की पाठ्यपुस्तकों की तैयारी
एक अन्य हलफनामे में, NCERT ने बताया कि उसने तीसरी भाषा के ढांचे को लागू करने के तहत 22 अनुसूचित भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों की तैयारी, समीक्षा, जांच, अंतिम रूप देने और उन्हें उपलब्ध कराने का काम पहले ही शुरू कर दिया है।

NCERT ने यह भी बताया कि मंत्रालय ने CBSE, NIOS और एकेडमिक विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाई है, ताकि कक्षा 9 के लिए बदलाव के दौर (ट्रांज़िशन फ़ेज़) में पाठ्यपुस्तकों के विकास में तेज़ी लाई जा सके।

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