रेलवे की जमीन पर कब्जा 42 नरेंद्र मोदी स्टेडियम के बराबर, RTI से हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Edited By Updated: 16 Jul, 2026 05:22 PM

encroachment on railway land equals the size of 42 narendra modi stadiums

ये आंकड़े सरकार द्वारा 27 मार्च, 2026 को संसद में दिए गए बयान से मेल खाते हैं, जिसमें सरकार ने कहा था कि 1 अप्रैल, 2025 तक भारतीय रेलवे के पास लगभग 4.99 लाख हेक्टेयर ज़मीन थी, जिसमें से लगभग 0.21 प्रतिशत ज़मीन पर अवैध रूप से कब्ज़ा था।

नेशनल डेस्क: भारतीय रेलवे की जमीन पर अवैध अतिक्रमण का साया गहराता जा रहा है। अवैध कब्जे और अतिक्रमण के मामले रेल प्रशासन के लिए केवल एक समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बन गए हैं। ऐसे में सूचना का अधिकार (RTI) के तहत रेलवे बोर्ड द्वारा साझा किए गए हालिया आंकड़ों से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। 

RTI से मिले आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, रेलवे की जमीन पर कब्जा 42 नरेंद्र मोदी स्टेडियम के बराबर है। मार्च 2025 तक रेलवे की लगभग 1068.54 हेक्टेयर ज़मीन पर अवैध रूप से अतिक्रमण था। हालांकि शुरुआती RTI अर्जी में रेलवे की जमीन पर कब्जे का 25 साल का इतिहास मांगा गया था, लेकिन रेलवे बोर्ड ने सिर्फ़ पांच साल की जानकारी दी। यह साफ है कि कब्जे वाली जमीन2020-21 में 810.31 हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 1,068.54 हेक्टेयर हो गई, यानी इसमें लगभग 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। 

ये आंकड़े सरकार द्वारा 27 मार्च, 2026 को संसद में दिए गए बयान से मेल खाते हैं, जिसमें सरकार ने कहा था कि 1 अप्रैल, 2025 तक भारतीय रेलवे के पास लगभग 4.99 लाख हेक्टेयर ज़मीन थी, जिसमें से लगभग 0.21 प्रतिशत जमीन पर अवैध रूप से कब्जा था। 

ऐसे समझिए, कितना बड़ा है यह कब्ज़ा

अतिक्रमण की गई इस जमीन की विशालता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम (अहमदाबाद स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम, जो करीब 25.5 हेक्टेयर में फैला है) जैसे 42 स्टेडियम इस कब्जे वाली जमीन पर बनाए जा सकते हैं। वहीं अगर फुटबॉल के हिसाब से देखें , तो यह क्षेत्रफल लगभग 1,496 फुटबॉल मैदानों के बराबर बैठता है। 

रिकॉर्ड की कमी ने बढ़ाई चिंता 

इस पूरे मामले में रेलवे बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। RTI के जवाब से सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि रेलवे बोर्ड किन चीजों का रिकॉर्ड नहीं रखता है। जब 25 साल का ट्रेंड पूछा गया, तो बोर्ड ने माना कि वह सिर्फ पांच साल की अवधि का ही अतिक्रमण डेटा रखता है; यानी दशकों में यह समस्या कैसे बढ़ी, इसका कोई सेंट्रलाइज़्ड या लंबे समय का रिकॉर्ड नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, लगातार बढ़ते इन आंकड़ों और संसद में उठे सवालों के बाद रेलवे बोर्ड अब इन अतिक्रमणों को खाली कराने के लिए एक व्यापक रणनीति पर काम कर रहा है।

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