Edited By Ramkesh,Updated: 18 May, 2026 07:51 PM

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी में गंगा नदी में एक नाव पर इफ्तार पार्टी करने और मांसाहार कर हड्डियां फेंकने के शेष छह आरोपियों को भी सोमवार को जमानत दे दी। इससे पूर्व 15 मई को अदालत ने 14 में से आठ आरोपियों को जमानत दे दी थी। शेष छह आरोपियों की...
प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी में गंगा नदी में एक नाव पर इफ्तार पार्टी करने और मांसाहार कर हड्डियां फेंकने के शेष छह आरोपियों को भी सोमवार को जमानत दे दी। इससे पूर्व 15 मई को अदालत ने 14 में से आठ आरोपियों को जमानत दे दी थी। शेष छह आरोपियों की जमानत याचिका मंजूर करते हुए न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला ने कहा, "इसी अपराध में आठ आरोपियों को 15 मई को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसलिए मौजूदा याचिकाकर्ता भी जमानत पाने के पात्र हैं।
भविष्य में इस तक के कार्य न करने का किया वादा
इससे पहले, न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला ने 15 मई को मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल आफरीदी, मोहम्मद तौसीफ अहमद और मोहम्मद अनस को यह कहते हुए जमानत प्रदान की थी कि ये आरोपी 17 मार्च, 2026 से जेल में निरुद्ध हैं और इन्होंने पछतावा जताते हुए भविष्य में इस तरह का कार्य नहीं करने का वादा किया है। इसी मामले में, न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने उसी दिन (15 मई) तीन आरोपियों मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद रजा और मोहम्मद फैजान को जमानत दी थी।
अपने कृत्य के लिए शर्मिंदा हैं
न्यायमूर्ति शुक्ला ने कहा था, "याचिकाकर्ता अपने कृत्य के लिए शर्मिंदा हैं और इनके परिजनों को भी इन कृत्यों से समाज को हुई पीड़ा को लेकर पछतावा है।" उन्होंने कहा था, "इस मामले के संपूर्ण तथ्यों और परिस्थितियों, याचिकाकर्ताओं के आपराधिक इतिहास और इनके द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को ध्यान में रखते हुए प्रथम दृष्टया जमानत देने का मामला बनता है।
गंभीर मामले में पुलिस ने दर्ज किया था केस
तथ्यों के मुताबिक, इस घटना के खिलाफ भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रजत जायसवाल ने 16 मार्च को वाराणसी के कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी जिसमें उसने कहा था कि इस घटना से एक खास समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि 15 मार्च को गंगा नदी में एक नाव पर इन व्यक्तियों ने रमजान तोड़ते हुए मांस खाया और अपशिष्ट गंगा नदी में फेंका। पुलिस ने पूजा स्थल को अपवित्र करने, धार्मिक भावनाएं भड़काने सहित बीएनएस की विभिन्न धाराएं लगाते हुए इन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इससे पूर्व, वाराणसी के सत्र न्यायालय ने एक अप्रैल को इन मुस्लिम युवाओं को जमानत देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि ऐसा प्रतीत होता है कि इन युवाओं का इरादा सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का था।