Edited By Tanuja,Updated: 18 May, 2026 05:11 PM

एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 2025 में ईरान समेत कई देशों में फांसी के मामलों में भारी उछाल आया। सऊदी अरब, कुवैत, मिस्र, यमन, अमेरिका और सिंगापुर में भी मौत की सजा के रिकॉर्ड टूटे। मानवाधिकार संगठनों ने इसे वैश्विक स्तर पर...
International Desk: मानवाधिकार संगठन ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ की ताजा रिपोर्ट ने दुनिया भर में मौत की सजा के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में ईरान सबसे ज्यादा फांसी देने वाला देश बनकर उभरा, लेकिन खाड़ी क्षेत्र और दुनिया के कई अन्य देशों में भी फांसी के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में ईरान में कम से कम 2,159 लोगों को फांसी दी गई। यह 1981 के बाद किसी भी एक वर्ष का सबसे बड़ा आंकड़ा है। एमनेस्टी ने आरोप लगाया कि इजरायल और अमेरिका के साथ तनाव बढ़ने के बाद ईरानी प्रशासन ने विरोध प्रदर्शनों, राजनीतिक असंतोष और कथित सुरक्षा मामलों में मौत की सजा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया।
सऊदी अरब में भी रिकॉर्ड फांसी
ईरान के अलावा सऊदी अरब में भी मौत की सजा का ग्राफ तेजी से बढ़ा। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में सऊदी अरब ने कम से कम 356 लोगों को फांसी दी, जो 2024 के 345 फांसी के रिकॉर्ड से भी ज्यादा है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि खाड़ी देशों में कठोर कानूनों और सुरक्षा अभियानों के नाम पर मौत की सजा का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। कुवैत में फांसी के मामलों में लगभग तीन गुना बढ़ोतरी दर्ज हुई। 2024 में जहां 6 लोगों को फांसी दी गई थी, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 17 पहुंच गया। मिस्र में भी मौत की सजा के मामलों में तेज उछाल आया और संख्या 13 से बढ़कर 23 हो गई। गृहयुद्ध और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे यमन में भी कम से कम 51 लोगों को फांसी दी गई, जो पिछले वर्षों की तुलना में एक-तिहाई से अधिक बढ़ोतरी है।
अमेरिका-सिंगापुरमें 2009 के बाद सबसे ज्यादा फांसी
एमनेस्टी की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे अमेरिकी महाद्वीप में अमेरिका अकेला ऐसा देश रहा जहां 2025 में मौत की सजा लागू की गई। फ्लोरिडा राज्य में रिकॉर्ड 19 फांसियों के कारण पूरे अमेरिका में कुल 47 लोगों को फांसी दी गई। यह 2009 के बाद अमेरिका का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। सख्त कानूनों के लिए प्रसिद्ध सिंगापुर में 2025 के दौरान 17 लोगों को फांसी दी गई। यह 2003 के बाद वहां का सबसे बड़ा आंकड़ा है। सिंगापुर सरकार का कहना है कि कठोर दंड नीति अपराध नियंत्रण के लिए जरूरी है, जबकि मानवाधिकार संगठन इसे अमानवीय और कठोर व्यवस्था बता रहे हैं।
चीन के आंकड़े अब भी रहस्य
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि वैश्विक आंकड़ों में चीन शामिल नहीं है, क्योंकि वहां मौत की सजा से जुड़ी जानकारी को सरकारी गोपनीयता माना जाता है।मानवाधिकार संगठनों का अनुमान है कि चीन में हर साल हजारों लोगों को फांसी दी जाती है, लेकिन वास्तविक संख्या कभी सार्वजनिक नहीं की जाती। एमनेस्टी ने चेतावनी दी कि दुनिया के कई देशों में सरकारें राजनीतिक नियंत्रण, सुरक्षा और असंतोष दबाने के लिए मौत की सजा का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की कि वह मौत की सजा के खिलाफ अधिक सख्त और स्पष्ट रुख अपनाए।