शंकराचार्य विवाद पर बड़ा कदम, GST डिप्टी कमिश्नर ने अपने पद से दिया इस्तीफा

Edited By Updated: 27 Jan, 2026 03:39 PM

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उत्तर प्रदेश के जीएसटी विभाग में उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) पद पर तैनात प्रशांत सिंह ने अपने पद से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में स्पष्ट किया है कि ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री...

नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश के जीएसटी विभाग में उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) पद पर तैनात प्रशांत सिंह ने अपने पद से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में स्पष्ट किया है कि ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर की गई हालिया टिप्पणियों से वे गहराई से आहत हैं। अधिकारी का कहना है कि मुख्यमंत्री के प्रति इस तरह की भाषा उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाती है और ऐसी स्थिति में सरकारी सेवा में बने रहना उन्हें उचित नहीं लगता।

इस्तीफे की वजह बताई भावनात्मक पीड़ा
प्रशांत सिंह ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ केवल एक प्रशासक नहीं, बल्कि एक संन्यासी और करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक हैं। उनके अनुसार, शंकराचार्य जैसे प्रतिष्ठित धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा मर्यादा की सीमाएं लांघकर की गई टिप्पणियों ने उन्हें मानसिक रूप से आहत किया है। एक लोक सेवक होने के बावजूद वे अपने आदर्श के अपमान को नजरअंदाज नहीं कर सके।


शंकराचार्य और सरकार के बीच बढ़ा तनाव
बीते कुछ दिनों से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच तनाव की खबरें सामने आ रही थीं। प्रयागराज के माघ मेले से जुड़े घटनाक्रम के बाद शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री और प्रशासन की भूमिका पर तीखी आलोचना की थी। प्रशांत सिंह का मानना है कि इन बयानों में संयम और मर्यादा का अभाव है, जिससे समाज और प्रशासन से जुड़े कई लोग असहज महसूस कर रहे हैं।


प्रशासन और सोशल मीडिया में तेज बहस
उपायुक्त स्तर के अधिकारी के इस्तीफे से प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक इस फैसले को लेकर बहस हो रही है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे नैतिक साहस का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे सेवा नियमों के लिहाज से असामान्य कदम मान रहे हैं। धार्मिक टिप्पणी के विरोध में किसी वरिष्ठ अधिकारी का पद छोड़ना एक नई मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।


बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे से तुलना
प्रशांत सिंह का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी पद छोड़ दिया था। हालांकि दोनों मामलों के कारण अलग हैं। अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी कानून और शंकराचार्य के शिष्यों से जुड़ी घटनाओं के विरोध में इस्तीफा दिया था, जबकि प्रशांत सिंह का फैसला मुख्यमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणियों से जुड़ा है। एक ही सप्ताह में दो वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे ने उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में वैचारिक मतभेदों को उजागर कर दिया है।


शासन की चुप्पी और आगे की स्थिति
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से प्रशांत सिंह के इस्तीफे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आम तौर पर ऐसे मामलों में सरकार पहले अधिकारी को समझाने या स्थिति की समीक्षा करने की प्रक्रिया अपनाती है। लेकिन प्रशांत सिंह अपने फैसले पर अडिग दिखाई दे रहे हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रदेश में धर्म, राजनीति और प्रशासन के बीच के जटिल संबंधों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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