Edited By Ramkesh,Updated: 17 Jul, 2026 02:18 PM

राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने तथा जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण के प्रावधानों को और सख्त करने संबंधी विधेयकों सहित कई विधेयकों को 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान...
नेशनल डेस्क: राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने तथा जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण के प्रावधानों को और सख्त करने संबंधी विधेयकों सहित कई विधेयकों को 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किए जाने के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण संशोधन विधेयक
लोकसभा सचिवालय ने एक बुलेटिन जारी कर यह भी बताया कि सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (एफसआरए) को विचार और पारित कराने के लिए भी सूचीबद्ध किया है। यह विधेयक बजट सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किया गया था लेकिन उस समय इस पर विचार और पारित नहीं कराया गया। माना जा रहा है कि उस समय केरल में विधानसभा चुनाव होने के कारण कुछ वर्गों, खासकर ईसाई परमार्थ संगठनों के विरोध के चलते इस विधेयक को आगे नहीं बढ़ाया गया। लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन के अनुसार, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश करने, उस पर विचार करने और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रावधान करता है।
मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक को मंजूरी
सूत्रों के अनुसार, इसके माध्यम से सरकार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाना चाहती है। इसके अलावा, जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी पेश करने, विचार करने और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है।इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (2023 में संशोधित) की धारा 13(3) में और संशोधन कर जन्म एवं मृत्यु के विलंबित पंजीकरण से संबंधित प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाना है।
इन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष
संसद के मानसून सत्र में विपक्षी दल के नीट पेपर लीक, पश्चिम एशिया संघर्ष में भारतीय नाविकों की मौत और पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने समेत कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की संभावना है। विपक्ष अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा भी संसद के मानसून सत्र में उठाएगा।
30 दिन तक हिरासत में रहने पर मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान
पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद विपक्ष कमजोर हुआ है। साथ ही, तमिलनाडु में तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के सरकार बनाने को लेकर कांग्रेस और द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के बीच मतभेद हैं। इन हालात से संसद सत्र के दौरान सत्तारूढ़ गठबंधन का हौसला बढ़ेगा। संसद की एक संयुक्त समिति संविधान संशोधन विधेयक पर एक रिपोर्ट को मंजूरी दे सकती है, जिसमें गंभीर आरोपों के मामले में लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान किया गया है।
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण
समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार आधिकारिक संशोधन भी ला सकती है। यह सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के लिए संख्या बल की परीक्षा होगी, क्योंकि संविधान संशोधन के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत का समर्थन आवश्यक होता है। इसी तरह का एक संविधान संशोधन विधेयक संसद के पिछले सत्र में लोकसभा में पारित नहीं हो सका था, क्योंकि सरकार इसके लिए जरूरी संख्या बल जुटाने में असफल रही थी। इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान था।
लोकसभा सीट की संख्या 50 प्रतिशत तक सीट बढ़ाना
आगामी सत्र में सरकार संसद से पारित कराने के लिए महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन के साथ-साथ परिसीमन विधेयक भी ला सकती है। सूत्रों के अनुसार सरकार दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर करने के लिए सभी राज्यों में लोकसभा सीट की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने के साथ ही, महिलाओं के लिए आरक्षण कानून से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के नए मसौदे को लागू करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। यह विधेयक दक्षिणी राज्यों की उन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया से लोकसभा में उनका राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है।