वायु प्रदूषण से 10 साल कम हो रही लोगों की जिंदगी, इस रिपोर्ट में हुआ डरावना खुलासा

Edited By Anil dev, Updated: 15 Jun, 2022 10:58 AM

national news punjab kesari delhi air pollution university of chicago

वायु प्रदूषण के कारण भारतीयों का जीवन पांच साल तक घट रहा है। शिकागो विश्वविद्यालय के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट द्वारा निर्मित वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक (एक्यूएलआई) के लेटेस्ट एडिशन को जारी किया है।

नेशनल डेस्क: वायु प्रदूषण के कारण भारतीयों का जीवन पांच साल तक घट रहा है। शिकागो विश्वविद्यालय के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट द्वारा निर्मित वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक (एक्यूएलआई) के लेटेस्ट एडिशन को जारी किया है।
यह सूचकांक 2020 के आंकड़ों पर आधारित है। इस अध्ययन में वायु प्रदूषण का संभावित जीवनकाल पर पड़ने वाले प्रभावों को बताया गया है। सूचकांक के मुताबिक देश की राजधानी दिल्ली ने एक बार फिर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष स्थान पाया है। दिल्ली में वायु प्रदूषण धूम्रपान से ज्यादा खतरनाक हो चुका है। धूम्रपान से संभावित जीवन में 1.5 वर्ष की कमी आती है लेकिन दिल्ली मे वायु प्रदूषण से जिंदगी करीब 10 साल तक कम हो सकती है।

प्रदूषित जगहों में है देश की 63 प्रतिशत आबादी
सूचकांक के मुताबिक भारत की 63 प्रतिशत आबादी उन जगहों पर रहती है जहां वायु प्रदूषण का स्तर देश के अपने राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक है।  इस वर्ष के विश्लेषण के अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और त्रिपुरा शीर्ष पांच प्रदूषित राज्यों में शामिल हैं, जो प्रदूषण के स्तर को पूरा करने पर जीवन प्रत्याशा में सबसे अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए खड़े हैं। विश्व स्तर पर भारत बांग्लादेश से पहले दूसरा सबसे प्रदूषित देश है। बांग्लादेश में खराब हवा के कारण 2020 में जीवन प्रत्याशा में 6.9 वर्ष की कमी आई है और इसके बाद नेपाल (4.1 वर्ष), पाकिस्तान (3.8 वर्ष) और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (2.9 वर्ष) का स्थान है।

3.3 साल का जीवन खो सकते हैं लोग
भारत, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान की औसत आबादी प्रदूषण के उच्च स्तर के संपर्क में हैं जो कि सदी के अंत की तुलना में 47 प्रतिशत अधिक है। यदि 2000 का प्रदूषण का स्तर समय के साथ स्थिर रहा, तो इन देशों के निवासी 3.3 साल का जीवन खोने की राह पर होंगे। भारत अपने उच्च कण प्रदूषण सांद्रता और बड़ी आबादी के कारण विश्व स्तर पर वायु प्रदूषण के उच्चतम स्तर के साथ स्वास्थ्य बोझ का सामना करता है। कण प्रदूषण का स्तर 2013 में 53 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से बढ़कर आज 56 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर हो गया है जो डब्ल्यूएचओ की सीमा से लगभग 11 गुना अधिक है।

प्रदूषण स्तर को कम नहीं कर पाए शहर
सूचकांक में कहा गया है कि भारत के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) 122 गैर-अनुपालन वाले शहरों में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए 2019 में शुरू की गई रणनीति के तहत 1.6 साल के जीवन को बचाने की क्षमता है। हालांकि 2017 के प्रदूषण स्तर के मुकाबले  2024 तक हानिकारक पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 और पीएम-10) के स्तर को 20-30 प्रतिशत तक कम करने का एनसीएपी का लक्ष्य गैर-बाध्यकारी है। एनसीएपी ट्रैकर के अनुसार प्रदूषण के स्तर को कम करने का लक्ष्य रखने वाले शहरों में या तो मामूली सुधार हुआ है या प्रदूषण के स्तर में वृद्धि हुई है। किसी भी शहर ने पीएम 2.5 के लिए 40 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम10 के लिए 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की राष्ट्रीय वार्षिक स्वीकार्य प्रदूषण सीमा हासिल नहीं की है।

भारत-गंगा मैदान में 21 गुना ज्यादा प्रदूषण
सूचकांक के अनुसार भारत-गंगा के मैदान में प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ की सीमा से 21 गुना अधिक है। अगर डब्ल्यूएचओ के संशोधित मानकों को पूरा करने के लिए वायु प्रदूषण के स्तर को नीचे लाया जाता है, तो औसत जीवन प्रत्याशा दिल्ली में 10.1 साल, बिहार में 7.9 साल और उत्तर प्रदेश में 8.9 साल तक बढ़ सकती है। लैंसेट द्वारा 2019 के एक अध्ययन में पाया गया कि वायु प्रदूषण देश में 16 लाख से अधिक मौतों के लिए जिम्मेदार था। एक्यूएलआई की निदेशक क्रिस्टा हसेनकॉफ ने एक बयान में कहा कि नवीनतम विज्ञान पर आधारित डब्ल्यूएचओ के नए दिशानिर्देश के साथ एक्यूएलआई को अपडेट करके, हम प्रदूषित हवा में सांस लेने के लिए भुगतान की जाने वाली वास्तविक कीमत पर बेहतर समझ रखते हैं। 

क्यों बढ़ता जा रहा है प्रदूषण
सालाना प्रकाशित होने वाले सूचकांक पर भारत का प्रदर्शन पिछले साल से बेहतर नहीं है। सूचकांक के अनुसार, 2000 के दशक की शुरुआत से भारत के प्रदूषण के स्तर के लिए सड़क वाहनों में चार गुना वृद्धि के अलावा  औद्योगीकरण, आर्थिक विकास और जनसंख्या वृद्धि के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। डब्ल्यूएचओ के संशोधित वायु प्रदूषण मानदंडों का उपयोग करते हुए, सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश हैं।

वेश्विक स्तर पर 2.2 साल घट रही हे जिंदगी
भारतीय राज्यों महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में, जहां 20 करोड़  लोग रहते हैं, वर्ष 2000 से प्रदूषण में क्रमशः 68.4 प्रतिशत और 77.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सूचकांक में कहा गया है कि यहां औसत व्यक्ति अब जीवन प्रत्याशा 1.5 से 2.2 वर्ष कम हो रही है। सूचकांक के अनुसार वैश्विक स्तर पर वायु प्रदूषण औसत व्यक्ति के जीवन के 2.2 वर्ष कम कर रहा है। जो कि धूम्रपान से (1.9 वर्ष), शराब के उपयोग (8 महीने), पानी और स्वच्छता (7 महीने), एचआईवी / एड्स (4 महीने) , मलेरिया (3 महीने) और आतंकवाद (9 दिन) से अधिक है। एक्यूएलआई से पता चलता है कि दुनिया भर में महामारी से प्रेरित लॉकडाउन का वैश्विक प्रदूषण के स्तर पर बहुत कम प्रभाव पड़ा।

Related Story

Trending Topics

Ireland

221/5

20.0

India

225/7

20.0

India win by 4 runs

RR 11.05
img title img title

Everyday news at your fingertips

Try the premium service

Subscribe Now!