Edited By Ramkesh,Updated: 21 Apr, 2026 02:37 PM

भारत-नेपाल के बीच कुल 1,751 किलोमीटर लंबी खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जिसका एक बड़ा हिस्सा बिहार के साथ जुड़ा हुआ है। यह सीमा हिमालयी क्षेत्र से लेकर सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों तक फैली हुई है और दोनों देशों के बीच मुक्त आवाजाही की विशेष व्यवस्था है।...
नेशनल डेस्क: भारत-नेपाल के बीच कुल 1,751 किलोमीटर लंबी खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जिसका एक बड़ा हिस्सा बिहार के साथ जुड़ा हुआ है। यह सीमा हिमालयी क्षेत्र से लेकर सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों तक फैली हुई है और दोनों देशों के बीच मुक्त आवाजाही की विशेष व्यवस्था है। लेकिन नई सरकार ने एक आदेश जारी किया है, जिसके बाद बार्डर का माहौल गरमा गया है।
दरअसल, भारत से लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये (करीब 63 भारतीय रुपये) से ज्यादा कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाने का फैसला लिया है। इस फैसले से भारत से ज्यादा नेपाल के लोग गुस्से में हैं। बिहार और नेपाल के बीच बेटी-रोटी का संबंध है। पर नेपाल के जेन जेड पीएम ये फैसला क्यों लिया इस पर स्थानी लोग काफी नाराज हैं।
उल्लेखनीय है कि भारत-नेपाल के बीच पांच राज्यों उत्तर प्रदेश में 551 किलोमीटर, बिहार में 726, पश्चिम बंगाल में 100, उत्तराखंड में 275 और सिक्किम 99 किलोमीटर की सीमा एक दूसरे से जुडी है। इन सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों की आजीविका, पारिवारिक संबंध और सांस्कृतिक जुड़ाव इस खुली सीमा पर हो रहे व्यापर पर निर्भर करते हैं। इस मामले में भारत-नेपाल संबंध के जानकारों का मानना है कि 'नेपाल की वर्तमान सरकार, भारत और चीन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, चीन से अपेक्षित आर्थिक सहयोग की उम्मीद और कर्ज को लेकर सावधानी बरतने के कारण नेपाल की नीतियां दबाव में हैं। इस हिचकिचाहट के कारण नेपाल की विकास परियोजनाएँ धीमी पड़ी हैं। भौगोलिक चुनौतियाँ, स्थानीय विरोध और नीतिगत अस्पष्टता भी इसमें बाधा बन रही हैं। नई सरकार 'आर्थिक लाभ' के आधार पर निर्णय ले रही है, लेकिन यह द्दष्टिकोण जमीनी स्तर पर सामाजिक वास्तविकताओं से टकराता दिख रहा है। फ़िलवक्त यह विवाद केवल कस्टम ड्यूटी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के पारंपरिक विश्वास और सहयोग की परीक्षा बनता जा रहा है, जिसका असर व्यापार, आवागमन और सांस्कृतिक संबंधों पर गहरा पड़ सकता है।