Edited By Tanuja,Updated: 21 Apr, 2026 11:28 AM

United States और Iran के बीच टकराव चरम पर है। नाकेबंदी, होर्मुज स्ट्रेट और परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद गहराया है। वहीं Pakistan मध्यस्थ बनकर वार्ता कराने की कोशिश कर रहा है, जिससे युद्ध टलने की उम्मीद भी बनी है।
International Desk: मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से विस्फोटक होते जा रहे हैं। अमेरिका (United States) और ईरान (Iran) के बीच तनाव अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां जंग और बातचीत दोनों की संभावनाएं साथ-साथ चल रही हैं। एक तरफ सीधा टकराव बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ आखिरी समय में कूटनीति भी सक्रिय हो गई है। नाकेबंदी, युद्ध की चेतावनियां और जहाज जब्ती के बीच अब पाकिस्तान में संभावित शांति वार्ता ने इस संकट को और दिलचस्प और संवेदनशील बना दिया है।
ट्रंप की नाकेबंदी पर धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड (Donald Trump) ने साफ कहा है कि ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी तब तक नहीं हटेगी, जब तक कोई समझौता नहीं होता। उनका कहना है कि यह दबाव ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करेगा । उन्होंने दावा किया कि यह नाकेबंदी ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रही है और अमेरिका इस संघर्ष में मजबूत स्थिति में है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो सैन्य कार्रवाई और तेज हो सकती है।
ईरान का करारा जवाब
ईरान ने अमेरिका के इस दबाव को सिरे से खारिज कर दिया है। इसके जवाब में ईरान ने भी सख्त रुख अपनाया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ (Mohammad Bagher Ghalibaf) ने कहा कि ईरान किसी भी दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकेगा। गालिबफ ने कहा कि अमेरिका युद्ध में ईरान से आत्मसमर्पण चाहता है लेकिन तेहरान इसके विपरीत मैदान में नए पत्ते खोलने की तैयारी कर रहा है। गालिबफ ने मंगलवार तड़के 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''हम धमकियों के साये में बातचीत स्वीकार नहीं करते।'' उन्होंने यह भी कहा कि देश ने जंग के लिए अपनी तैयारी पूरी कर ली है और जरूरत पड़ी तो हर स्तर पर जवाब दिया जाएगा। ईरानी संसद के स्पीकर ने कहा कि अमेरिका सीजफायर तोड़कर ईरान को झुकाना चाहता है, लेकिन तेहरान किसी भी दबाव में बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने पिछले दो हफ्तों में अपनी सैन्य तैयारी और मजबूत कर ली है और अगर हमला हुआ तो जवाब भी उतना ही कड़ा होगा।
अंतिम फैसला बाकी
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा केंद्र होर्मुज (Strait of Hormuz) बन गया है। यही रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से के तेल व्यापार के लिए अहम है। अमेरिका ने हाल ही में एक ईरानी जहाज को कब्जे में लिया, जिसे ईरान ने “समुद्री डकैती” बताया और उसके क्रू की रिहाई की मांग की है। तनाव के बीच एक अहम मोड़ यह है कि Iran अब Pakistan में United States के साथ शांति वार्ता में शामिल होने पर विचार कर रहा है। पाकिस्तान इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है।हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन संकेत हैं कि बातचीत का रास्ता खुल सकता है।
अमेरिका भी इस वार्ता के लिए तैयार बताया जा रहा है। दोनों देशों के बीच सबसे बड़े मतभेद दो मुद्दों पर हैं ईरान चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका नियंत्रण बना रहे, जबकि अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाए और इस समुद्री रास्ते पर उसका नियंत्रण सीमित हो। इस बीच, युद्धविराम खत्म होने का समय भी करीब आ रहा है। अगर उससे पहले कोई समझौता नहीं हुआ, तो हालात और बिगड़ स