Edited By Anu Malhotra,Updated: 02 Oct, 2026 10:53 AM

ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने शुक्रवार को यहां चीन की बाओ ज़ियी को हराकर भारत के लिए एशियाई खेलों की महिला मुक्केबाजी में 12 साल बाद स्वर्ण पदक जीता। लवलीना ने 75 किग्रा वर्ग के फाइनल में बाओ को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से मात दी।
नई दिल्ली: ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने शुक्रवार को यहां चीन की बाओ ज़ियी को हराकर भारत के लिए एशियाई खेलों की महिला मुक्केबाजी में 12 साल बाद स्वर्ण पदक जीता। लवलीना ने 75 किग्रा वर्ग के फाइनल में बाओ को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से मात दी।
इस जीत के साथ उन्होंने पिछले एशियाई खेलों में जीते रजत पदक का रंग बदलकर स्वर्ण कर लिया। पिछली बार उन्हें फाइनल में चीन की एक अन्य मुक्केबाज ली कियान के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
लवलीना एशियाई खेलों में मुक्केबाजी का स्वर्ण जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बन गई हैं। उनसे पहले महान मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम ने 2014 के इंचियोन एशियाई खेलों में 51 किग्रा फ्लाइवेट वर्ग का स्वर्ण पदक जीता था। आइची-नागोया में भारतीय मुक्केबाजों ने पिछले एशियाई खेलों के प्रदर्शन में सुधार करते हुए अब तक छह पदक पक्के कर लिए हैं। प्रिया घंघास (60 किग्रा), कपिल पोखरिया (90 किग्रा) और नरेंद्र बरवाल (90 किग्रा से अधिक) ने कांस्य पदक जीते हैं। परवीन हुड्डा (65 किग्रा) और अंकुश पंघाल (80 किग्रा) दिन में बाद में स्वर्ण पदक के लिए रिंग में उतरेंगे।
एशियाई खेलों में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाजी प्रदर्शन 2010 के ग्वांगझोउ खेलों में रहा था, जहां भारतीय दल ने कुल नौ पदक जीते थे। इनमें दो स्वर्ण, तीन रजत और चार कांस्य पदक शामिल थे। महाद्वीपीय प्रतियोगिता में भारतीय मुक्केबाजों का यह शानदार प्रदर्शन पिछले महीने ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में रिकॉर्डतोड़ अभियान के बाद आया है।