Edited By Ramanjot,Updated: 07 Feb, 2026 09:53 PM

बिहार की राजनीति में हलचल मचाते हुए पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को पटना पुलिस ने 1995 के एक पुराने फर्जीवाड़ा मामले में गिरफ्तार कर लिया है।
नेशनल डेस्क: बिहार की राजनीति में हलचल मचाते हुए पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को पटना पुलिस ने 1995 के एक पुराने फर्जीवाड़ा मामले में गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार देर रात उन्हें पटना स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया। मामला गर्दनीबाग थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जिसमें किराए के मकान के कथित गलत इस्तेमाल और धोखाधड़ी के आरोप दर्ज हैं। बताया जा रहा है कि लंबे समय से अदालत में पेशी नहीं देने के कारण कोर्ट के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई।
गिरफ्तारी के वक्त हंगामा, सुरक्षा को लेकर जताई आशंका
गिरफ्तारी के दौरान माहौल तनावपूर्ण रहा। पप्पू यादव ने पुलिस के सादे कपड़ों में पहुंचने पर सवाल उठाते हुए अपनी जान को खतरा बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा कोई अनहोनी हो सकती है और वे थाने नहीं बल्कि सीधे कोर्ट में पेश होना चाहते थे। पुलिस कार्रवाई के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। पहले उन्हें IGIMS ले जाया गया, जहां से बाद में बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में भर्ती कराया गया।
न्यायिक हिरासत, जेल की जगह अस्पताल में इलाज
शनिवार को पप्पू यादव को पटना सिविल कोर्ट के MP-MLA कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें दो दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। हालांकि स्वास्थ्य कारणों को देखते हुए उन्हें जेल भेजने के बजाय PMCH में पुलिस निगरानी में रखने का फैसला हुआ है। उनका इलाज डॉक्टरों की निगरानी में जारी है, जबकि पुलिस सुरक्षा तैनात की गई है।
जमानत पर कब होगी सुनवाई?
पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सोमवार, 9 फरवरी 2026 को सुनवाई होगी। तब तक वे न्यायिक हिरासत में रहेंगे। उनके वकील शिवनंदन भारती ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामला बेहद पुराना है और सांसद ने जांच में पूरा सहयोग किया था। उन्होंने इसे राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई बताया।
सियासी बयानबाजी तेज
इस गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है और तथ्यों को जाने बिना टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। 31 साल पुराने केस में हुई इस गिरफ्तारी ने बिहार की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है। अब सबकी नजरें सोमवार की जमानत सुनवाई पर टिकी हैं।