गैस आपूर्ति बढ़ाने के लिए नियमों में ढील, प्लास्टिक-पैकेजिंग इंडस्ट्री को मिली राहत

Edited By Updated: 02 Apr, 2026 08:12 PM

relaxation in rules to increase gas supply relief for plastic packaging industr

सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर (एलपीजी) की आपूर्ति बढ़ाने के लिए पहले सख्त किए गए प्रावधानों में बृहस्पतिवार को ढील देते हुए रिफाइनरियों को निर्देश दिया कि वे पेट्रोरसायन उद्योग को प्रोपिलीन की सीमित आपूर्ति दोबारा शुरू करें। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है...

नेशनल डेस्क: सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर (एलपीजी) की आपूर्ति बढ़ाने के लिए पहले सख्त किए गए प्रावधानों में बृहस्पतिवार को ढील देते हुए रिफाइनरियों को निर्देश दिया कि वे पेट्रोरसायन उद्योग को प्रोपिलीन की सीमित आपूर्ति दोबारा शुरू करें। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता देने की वजह से प्लास्टिक, पैकेजिंग से लेकर कंडोम उत्पादन जैसे कई उद्योगों में कच्चे माल की कमी की स्थिति पैदा होने लगी थी। 

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने यहां एक अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते भारत की एलपीजी आपूर्ति प्रभावित होने के बाद नौ मार्च को सभी रिफाइनरियों और पेट्रोरसायन इकाइयों को एलपीजी उत्पादन तेज करने का निर्देश दिया गया था। इसके लिए सरकार ने कहा था कि रिफाइनरी प्रोपेन, ब्यूटेन एवं प्रोपिलीन की समूची उत्पादित मात्रा का इस्तेमाल एलपीजी उत्पादन में करें और इनकी आपूर्ति केवल सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को करें। 

शर्मा ने कहा, ''लेकिन कुछ अन्य क्षेत्रों को भी इन कच्चे रसायनों की जरूरत होती है, और इसी कारण यह निर्णय लिया गया है।'' असल में, सरकार के पिछले निर्देश की वजह से पेट्रोरसायन उद्योग को मिलने वाला प्रोपिलीन लगभग बंद हो गया था, जिससे प्लास्टिक और पैकेजिंग सामग्री का उत्पादन प्रभावित हुआ। कच्चे माल की कमी का असर खाद्य एवं पेय उद्योग, एफएमसीजी क्षेत्र और कंडोम उद्योग तक देखने को मिला। अब सरकार ने स्थिति की समीक्षा के बाद रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे प्रोपिलीन का एक हिस्सा पेट्रोरसायन उद्योग को भी आवंटित करें। 

हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं की आपूर्ति प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये होती है। लेकिन ईरान संकट के कारण इस समुद्री मार्ग में व्यवधान होने से आयातित एलपीजी पर दबाव बढ़ा और घरेलू उत्पादन को अधिकतम करना पड़ा।

अधिकारियों के अनुसार, वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी आवंटन पहले 20 प्रतिशत तक सीमित किया गया था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत और अब 70 प्रतिशत कर दिया गया है। इसमें 10 प्रतिशत हिस्सा पाइप से रसोई गैस की आपूर्ति (पीएनजी) विस्तार से जुड़ा है। वाणिज्यिक एलपीजी का यह अतिरिक्त आवंटन रेस्तरां, ढाबों, होटल, औद्योगिक कैंटीन, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, डेयरी क्षेत्र और राज्य सरकारों द्वारा संचालित सब्सिडी वाले सामुदायिक किचन को प्राथमिकता के आधार पर दिया जा रहा है।

इसके अलावा इस्पात, वाहन, रसायन और प्लास्टिक जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को भी अतिरिक्त आवंटन में प्राथमिकता दी गई है, खासकर उन इकाइयों को जहां प्राकृतिक गैस का विकल्प उपलब्ध नहीं है। हालांकि, शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों को अब भी आवंटन में प्राथमिकता मिल रही है और कुल वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन में इनकी हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत है। शर्मा ने बताया कि 14 मार्च से अब तक विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 60,000 टन वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है, जबकि 4.3 लाख छोटे (पांच किलो वाले) सिलेंडर भी बेचे गए हैं।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!