Edited By Tanuja,Updated: 30 May, 2026 03:07 PM

अमेरिकी सेना के सेवानिवृत्त कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान-इजराइल युद्ध को रोकना चाहें तो कर सकते हैं, लेकिन अमेरिका के प्रभावशाली और धनी इजराइल समर्थक समूह उनके खिलाफ हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप की सबसे...
Washington: अमेरिकी सेना के सेवानिवृत्त कर्नल और भू-राजनीतिक विश्लेषक गलस मैकग्रेगर ने दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपके सामने ईरान-इजराइल संघर्ष को लेकर एक गंभीर राजनीतिक दुविधा खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि यदि ट्रंप फारस की खाड़ी में चल रहे सैन्य अभियानों को रोकने का फैसला करते हैं तो अमेरिका के प्रभावशाली इजराइल समर्थक वित्तीय समूह उनका समर्थन वापस ले सकते हैं। एक इंटरव्यू में मैकग्रेगर ने कहा कि अधिकांश अमेरिकी नागरिक फारस की खाड़ी में चल रही घटनाओं में विशेष रुचि नहीं रखते और यदि ट्रंप कल ही सैन्य अभियान रोकने की घोषणा कर दें तो आम जनता इसका विरोध नहीं करेगी।
युद्ध से थक चुकी अमेरिकी जनता
मैकग्रेगर के अनुसार अमेरिकी लोगों की प्राथमिक चिंता घरेलू अर्थव्यवस्था है, न कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष।उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रपति ट्रंप सार्वजनिक रूप से यह कह दें कि दुनिया के सहयोगी देश युद्ध समाप्त करने और समुद्री व्यापार बहाल करने की मांग कर रहे हैं, तो अधिकांश अमेरिकी नागरिक इस निर्णय का समर्थन करेंगे।पूर्व कर्नल ने दावा किया कि फारस की खाड़ी में अस्थिरता का असर ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। उनके अनुसार तेल और गैस क्षेत्र के कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि संकट लंबा खिंचता है तो अमेरिका के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राज्य California आयातित तेल पर काफी हद तक निर्भर है और खाड़ी क्षेत्र में व्यवधान का सीधा असर वहां पड़ सकता है।
इजराइल समर्थक अरबपति डाल सकते ट्रंप पर दबाव
मैकग्रेगर का सबसे विवादास्पद दावा यह रहा कि अमेरिका में मौजूद कुछ अत्यंत प्रभावशाली और धनाढ्य इजराइल समर्थक समूह ट्रंप को चेतावनी दे सकते हैं कि यदि उन्होंने इजराइल का साथ छोड़ा तो उन्हें राजनीतिक और आर्थिक समर्थन नहीं मिलेगा। हालांकि यह मैकग्रेगर का व्यक्तिगत आकलन है और इसके समर्थन में उन्होंने कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। यह बयान डगलस मैकग्रेगर के व्यक्तिगत विश्लेषण और राजनीतिक आकलन पर आधारित है। अमेरिकी सरकार, व्हाइट हाउस या इजराइली सरकार ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है। इसलिए इन्हें आधिकारिक नीति के बजाय एक पूर्व सैन्य अधिकारी की राय के रूप में देखा जाना चाहिए।
नेतन्याहू और ट्रंप की रणनीति अलग
मैकग्रेगर ने कहा कि Benjamin Netanyahu और ट्रंप के रणनीतिक लक्ष्य अलग-अलग दिखाई देते हैं। उनका दावा है कि नेतन्याहू ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहते हैं और इस संघर्ष को क्षेत्र के अन्य देशों के लिए एक संदेश के रूप में देखते हैं। वहीं ट्रंप समझौते और संघर्ष विराम के जरिए क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना चाहते हैं। मैकग्रेगर के अनुसार ट्रंप के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वे नेतन्याहू की रणनीति से खुद को अलग कर पाएंगे और युद्ध को रोकने का निर्णय ले पाएंगे। उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है कि ट्रंप पूरी तरह इस रास्ते पर जाने को तैयार हैं।