छात्र-सरकार के बीच रविवार को घंटों बैठक, सोमवार को ‘विधानसभा घेराव’ मार्च; जानिए कहां फंसा पेंच?

Edited By Updated: 10 Aug, 2026 01:31 PM

students vidhan sabha gherao march in ranchi protest amidst water cannons

झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है।

रांची: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सोमवार को प्रदर्शनकारी छात्रों ने ‘विधानसभा घेराव’ मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसी बीच एक छात्र पुलिस की बैरिकेडिंग पर चढ़ गया और वहां डांस करने लगा। प्रदर्शन स्थल पर छात्रों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली।

9 दिनों से भूख हड़ताल पर छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी प्रदर्शनकारी छात्रों के विधानसभा घेराव मार्च में शामिल हुए। वे पिछले नौ दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में भूख हड़ताल पर हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी मांगें केवल वर्तमान आंदोलन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ी हुई हैं।

रविवार को सरकार और छात्रों के बीच बैठक

JPSC-JSSC अभ्यर्थियों और राज्य सरकार के बीच रविवार को तीसरे दौर की बातचीत हुई। रांची के स्टेट गेस्ट हाउस में हुई इस बैठक में छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी विभिन्न मांगें सरकार के सामने रखीं। बैठक चार घंटे से अधिक समय तक चली। सरकार की ओर से दावा किया गया कि आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की करीब 98 फीसदी मांगें मान ली गई हैं। हालांकि, छात्रों की सबसे अहम मांगों में शामिल CGL परीक्षा रद्द करने के मुद्दे पर सरकार सहमत नहीं हुई। यही मुद्दा अब आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।

JPSC और बैकलॉग भर्तियों की जांच का आश्वासन

सरकार ने 14वीं JPSC और 2023-25 की बैकलॉग भर्तियों में सामने आई कथित आपराधिक गड़बड़ियों की जांच CID से कराने की बात कही है। छात्रों ने कथित वित्तीय लेन-देन की ED से जांच कराने, फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने और 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने जैसी मांगें भी सरकार के सामने रखी हैं। हालांकि, सरकार ने CGL परीक्षा रद्द करने की मांग को स्वीकार नहीं किया। सरकार का कहना है कि परीक्षा सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की निगरानी में आयोजित हुई थी। इसलिए परीक्षा रद्द करने के बजाय सरकार ने एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनाने का प्रस्ताव दिया है।

CGL परीक्षा रद्द करने पर अड़े अभ्यर्थी

छात्रों ने सरकार के निगरानी समिति वाले प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि कथित अनियमितताओं को लेकर उनकी मुख्य मांग CGL परीक्षा को रद्द कर दोबारा निष्पक्ष तरीके से परीक्षा कराने की है। छात्रों के मुताबिक, जब तक उनकी इस प्रमुख मांग पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

विधानसभा घेराव से बढ़ा दबाव

रविवार की बातचीत के बाद सोमवार को छात्रों ने विधानसभा घेराव का ऐलान किया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी मार्च में शामिल हुए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की और स्थिति नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच इस गतिरोध का समाधान कैसे निकलता है। एक तरफ सरकार कई मांगों पर सहमति बनने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर छात्र CGL परीक्षा रद्द करने की अपनी प्रमुख मांग पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

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