बिहार सरकार ने खोला खजाना, सिंधु दर्शन यात्रा पर श्रद्धालुओं को देगी ₹20 हजार अनुदान

Edited By Updated: 24 Jun, 2026 12:45 PM

the bihar government has opened its coffers and will provide a grant

बिहार सरकार ने श्रद्धालुओं, पर्यटकों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी है। राज्य मंत्रिमंडल ने सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा वित्तीय सहायता अनुदान योजना-2026, मुख्यमंत्री बिहार हेली-टूरिज्म एवं एयर टूरिज्म सेवा योजना-2026 तथा...

नेशनल डेस्क: बिहार सरकार ने श्रद्धालुओं, पर्यटकों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी है। राज्य मंत्रिमंडल ने सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा वित्तीय सहायता अनुदान योजना-2026, मुख्यमंत्री बिहार हेली-टूरिज्म एवं एयर टूरिज्म सेवा योजना-2026 तथा मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना-2026 को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इन योजनाओं का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन, हवाई पर्यटन और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना है।

आर्थिक विकास को मिलेगी गति
आपको बता दें कि धार्मिक उत्साह और सांस्कृतिक समारोहों के बीच मंगलवार को लेह में 30वीं सिंधु दर्शन यात्रा के साथ ही पहले 'सिंधु कुंभ' की शुरुआत हुई। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस आयोजन को पर्यावरण-आध्यात्मिक पर्यटन तथा आर्थिक विकास को गति देने वाला बताया। उपराज्यपाल ने कहा कि यह आयोजन लद्दाख को शांति और आध्यात्मिकता के एक वैश्विक गंतव्य के रूप में उभारने में मददगार साबित होगा। 

पांच दिवसीय उत्सव 27 जून तक चलेगा
अधिकारियों ने बताया कि 'सिंधु दर्शन यात्रा समिति' द्वारा आयोजित यह पांच दिवसीय उत्सव 27 जून तक चलेगा। इसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, आध्यात्मिक गुरु, विद्वान, गणमान्य व्यक्ति और पर्यटक हिस्सा ले रहे हैं। केंद्रीय मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभणिया ने उद्घाटन समारोह में शिरकत की और भारत की आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मना रहे हजारों श्रद्धालुओं के साथ शामिल हुईं। 

राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक
अधिकारियों के मुताबिक, यह आयोजन 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के मुख्य विषय के तहत किया जा रहा है, जो राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता को रेखांकित करता है। समारोह की शुरुआत एक भव्य कलश यात्रा के साथ हुई, जिसमें देश भर की विभिन्न नदियों से एकत्रित पवित्र जल लाया गया था। अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं ने पारंपरिक अनुष्ठान के साथ इस जल को पवित्र सिंधु नदी में अर्पित किया, जो राष्ट्रीय अखंडता और विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं व परंपराओं के लोगों को जोड़ने वाले आध्यात्मिक बंधन का प्रतीक है। 
 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!