मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बड़ी पहल, ओबीसी बेटियों की शादी में सहारा बनी सरकार

Edited By Updated: 30 Apr, 2026 07:34 PM

the government becomes a pillar of support for the marriages of obc daughters

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही योजनाएं समाज के कमजोर वर्गों के लिए राहत का बड़ा आधार बन रही हैं। खासतौर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की गरीब बेटियों की शादी में आर्थिक मदद देकर सरकार एक अभिभावक की भूमिका निभा रही है।

नेशनल डेस्क : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही योजनाएं समाज के कमजोर वर्गों के लिए राहत का बड़ा आधार बन रही हैं। खासतौर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की गरीब बेटियों की शादी में आर्थिक मदद देकर सरकार एक अभिभावक की भूमिका निभा रही है। शादी अनुदान योजना के तहत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1 लाख से अधिक बेटियों को आर्थिक सहायता दी है। इस योजना में विकलांग, विधवा, आपदा प्रभावित और भूमिहीन आवेदकों को प्राथमिकता दी जाती है। 

ओबीसी बेटियों की शादी में सहारा बनी योगी सरकार

दरअसल राज्य सरकार की शादी अनुदान योजना गरीब परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। आर्थिक तंगी के कारण जहां बेटियों की शादी में कठिनाई आती थी, वहीं अब सरकार सीधे आर्थिक सहायता देकर इस बोझ को कम कर रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के तहत 1,16,000 से अधिक लाभार्थियों को सहायता दी गई है। इसके लिए 232 करोड़ रुपये खर्च किए गये हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि योजना बड़े स्तर पर लागू हो रही है और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच रही है।

प्रति शादी 20 हजार रुपये की मदद

योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी की शादी के लिए 20,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। इस योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को मिलता है जिनकी वार्षिक आय 1 लाख रुपये तक है। साथ ही, लड़की की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष होना अनिवार्य है, जिससे बाल विवाह पर भी रोक लगाने में मदद मिलती है।

कमजोर वर्गों को प्राथमिकता

सरकार ने इस योजना में संवेदनशील वर्गों को प्राथमिकता दी है। विकलांग, विधवा, दैवीय आपदा से प्रभावित और भूमिहीन परिवारों को आवेदन में वरीयता दी जाती है। साल 2016-17 से यह योजना पूरी तरह से ऑनलाइन कर दी गई थी। आवेदक निर्धारित पोर्टल पर शादी की तिथि से 90 दिन पहले या 90 दिन बाद तक आवेदन कर सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खंड विकास अधिकारी और शहरी क्षेत्रों में उपजिलाधिकारी द्वारा ऑनलाइन सत्यापन किया जाता है।

पीएफएमएस के जरिए सीधे खाते में भुगतान

योजना के तहत अनुदान राशि पीएफएमएस के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई है। वहीं लाभार्थियों के चयन के लिए जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। जिसमें मुख्य विकास अधिकारी-उपाध्यक्ष, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी-सदस्य/सचिव और जनपद के सांसद एवं विधायक अथवा उनके नामित प्रतिनिधि सदस्य के रूप में नामित है। इस तरह जनप्रतिनिधियों की भी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इससे योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहती है।

आधार प्रमाणीकरण से मजबूत हुई व्यवस्था

वित्तीय वर्ष 2023-24 से आवेदक और लाभार्थी की पुत्री का आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगी है। इससे सही पात्रों को ही लाभ मिल रहा है, जिससे पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित शादी अनुदान योजना अन्य पिछड़े वर्ग के जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रति बेटी की शादी पर 20,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में प्रदान की जाती है।

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