फोनपे के बिज़नेस मॉडल को समझेंः डी.आर.एच.पी की महत्वपूर्ण बातें

Edited By Updated: 30 Jan, 2026 11:42 PM

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फोनपे का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डी.आर.एच.पी) इसका विस्तृत लुक प्रदान करता है कि डिजिटल पेमेंट्स कंपनी अपने ऑपरेशंस को किस प्रकार संरचनाबद्ध करती है। यह फाइलिंग एक ऐसा बिज़नेस मॉडल प्रदर्शित करती है, जो डाईवर्सिफिकेशन, ईकोसिस्टम के विकास और...

(वेब डेस्क): फोनपे का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डी.आर.एच.पी) इसका विस्तृत लुक प्रदान करता है कि डिजिटल पेमेंट्स कंपनी अपने ऑपरेशंस को किस प्रकार संरचनाबद्ध करती है। यह फाइलिंग एक ऐसा बिज़नेस मॉडल प्रदर्शित करती है, जो डाईवर्सिफिकेशन, ईकोसिस्टम के विकास और राजस्व के विभिन्न स्रोतों द्वारा बना है और सामान्य पीयर-टू-पीयर लेन-देन के मुकाबले काफी व्यापक है। फोनपे के बारे में एक आम धारणा यह है कि इसका ज्यादातर व्यवसाय पीयर-टू-पीयर भुगतान तथा स्कैन-एंड-पे लेन-देन पर आधारित है। डी.आर.एच.पी से स्पष्ट होता है कि कंपनी द्वारा जिसे ‘भुगतान’ कहा जाता है, वह असल में ‘भुगतान प्लस’ है, जिसमें सेवाओं और लेन-देन का विस्तृत समूह शामिल है। 

पीयर-टू-पीयर (पी2पी) भुगतान में फोनपे का हिस्सा काफी बड़ा है, लेकिन इसके अलावा यह इन-ऐप मर्चैंट पेमेंट्स के लिए एक महत्वपूर्ण डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म के रूप में भी काम करता है। यह प्लेटफॉर्म मोबाईल रिचार्ज, फास्टटैग रिचार्ज, डीटीएच रिचार्ज, बिल भुगतान और यूटिलिटीज़, ट्रैवल एवं ट्रांज़िट बुकिंग और डिजिटल गोल्ड एवं सिल्वर जैसी डिस्ट्रीब्यूशन सेवाएं भी प्रदान करता है। फोनपे ये सेवाएं विभिन्न मर्चैंट्स के साथ साझेदारी में पेश करता है और इन लेन-देन के लिए फोनपे को कमीशन और प्लेटफॉर्म फीस मिलती है।
कंज़्यूमर पेमेंट में राजस्व की संरचना डी.आर.एच.पी के अनुसार, फोनपे को कंज़्यूमर पेमेंट्स से राजस्व प्राप्त होता है। यह राजस्व लेन-देन की प्रोसेसिंग फीस और कंज़्यूमर प्लेटफॉर्म फीस के रूप में होता है। फाइलिंग में निम्नलिखित राजस्व प्रणालियों की रूपरेखा दी गई हैः

    पर्सन-टू-पर्सन ट्रांसफर: कंपनी को लेन-देन के लिए पार्टनर बैंकों से प्रोसेसिंग फीस मिलती है।
    सेवा आपूर्ति: मोबाईल रिचार्ज, बिल भुगतान, डिजिटल गोल्ड और सिल्वर की लेन-देन, ट्रैवल टिकट, ट्रांज़िट बुकिंग, क्यूआर स्कैन-एंड-पे और विभिन्न ऐप्स एवं वेबसाईट पर ऑनलाईन भुगतान के लिए फोनपे को टेलीकॉम कंपनियों, भारत कनेक्ट (पूर्व में बी.बी.पी.एस) और ऑनलाईन ट्रैवल एजेंसीज़ आदि से प्रोसेसिंग फीस मिलती है। यह फीस पार्टनर या फिर पेशकश के आधार पर लेन-देन में शामिल रकम के कुछ प्रतिशत हिस्से के रूप में हो सकती है, या फिर प्रति लेन-देन एक निश्चित रकम के रूप में। 
    पी2एम यू.पी.आई इंसेंटिव: पर्सन-टू-मर्चैंट यू.पी.आई भुगतान के लिए छोटे मर्चैंट को फोनपे के माध्यम से दी गई 2,000 रुपये से कम की रकम के लिए कंपनी को पेयर पेमेंट सर्विस प्रोवाईडर (पी.एस.पी) बैंक और पेयर ऐप को दिए जाने वाले डिजिटल इंसेंटिव का एक हिस्सा मिलता है। ये भुगतान रिचार्ज, बिल, डिजिटल गोल्ड और सिल्वर के लेन-देन, ट्रैवल ट्रांज़िट, क्यूआर स्कैन-एंड-पे और ऑनलाईन खरीद के लिए किए गए हो सकते हैं। इंसेंटिव की गणना टोटल पेमेंट वैल्यू (टीपीवी) के प्रतिशत हिस्से के रूप में की जाती है और यह भुगतान के प्रकार, पार्टनर और लेन-देन के मूल्य के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

ऑपरेटिंग लेवरेज का लाभ
डी.आर.एच.पी के मुताबिक 300 मिलियन से अधिक मासिक एक्टिव यूज़र फोनपे का उपयोग करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में यूज़र बड़ा ऑपरेटिंग लाभ प्रदान करते हैं। कंपनी यूज़र्स की संख्या या मार्केटिंग के खर्च में बढ़त किए बिना ही समान प्लेटफॉर्म पर नई श्रेणियों का लॉन्च कर सकती है। फाइलिंग के अनुसार, इतने विशाल यूज़र्स नई श्रेणियों के लॉन्च पर तेजी से वृद्धि संभव बनाते हैं क्योंकि उन्हें नई पेशकशें अपने उसी ऐप के माध्यम से दी जा सकती हैं, जो वो इस्तेमाल करते आ रहे हैं।
पेमेंट्स फंक्शन के उपयोग का पैटर्न आदतन होता है। यूज़र्स इस ऐप का उपयोग रोज करते हैं। कभी-कभी एक दिन में कई बार भी करते हैं। इतने अधिक उपयोग से नई सेवाएं लॉन्च करने और उनका वितरण करने के लिए एक मजबूत आधार मिलता है, जिससे अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होती है। 

मर्चैंट सर्विस का राजस्व
मर्चैंट की ओर से फोनपे को विभिन्न उत्पादों और सेवाओं द्वारा राजस्व मिलता है। इनमें स्मार्ट स्पीकर क्यूआर सिस्टम, ईडीसी (इलेक्ट्रॉनिक डेटा कैप्चर) मशीन, बिलिंग और पी.ओ.एस इंटीग्रेटेड सॉल्यूशन तथा पेमेंट गेटवे सेवाएं शामिल हैं। डी.आर.एच.पी के अनुसार मर्चैंट बेस में और इन-ऐप हर कंज़्यूमर श्रेणी एक राजस्व स्रोत पेश करती है। फोनपे का मॉडल ऐप में मौजूद हर वितरण श्रेणी में ग्राहकों के लिए वितरकों से वितरण शुल्क, सुविधा शुल्क, प्लेटफॉर्म शुल्क और कमीशन प्राप्त करता है।

फाइनेंशियल सेवाओं का विकास
डी.आर.एच.पी के मुताबिक फोनपे के फाइनेंशियल सेवा सेगमेंट ने राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देना शुरू कर दिया है। तीन साल पहले शुरू हुए लेंडिंग वर्टिकल में कंज़्यूमर और मर्चैंट लोन दोनों शामिल हैं। फाइलिंग में दिए गए डेटा से इस सेगमेंट में वृद्धि प्रदर्शित होती है। हालाँकि कंपनी की ज्यादा स्थापित सेवाओं की तुलना में यह अभी भी काफी कम है। 

आमतौर पर लोगों का मानना है कि फोनपे का डाईवर्सिफिकेशन फाइनेंशियल सेवाओं पर केंद्रित है, जो खासकर इंश्योरेंस और लेंडिंग के क्षेत्र में हैं, पर कुछ सूचीबद्ध कंपनियों के मुकाबले छोटे स्तर पर काम करता है। लेकिन डी.आर.एच.पी के अनुसार कंपनी का डाईवर्सिफिकेशन ग्राहक सेवाओं के लिए इसके वितरण प्लेटफॉर्म के माध्यम से बहुत ज्यादा व्यापक है।

प्लेटफॉर्म की अर्थव्यवस्था
फोनपे एक प्लेटफॉर्म बिज़नेस के रूप में काम करता है, जिसमें ग्राहक आदतन पेमेंट के लिए इसका उपयोग करते हैं। फाइलिंग के अनुसार इसके बार-बार उपयोग होने पर नई सेवा श्रेणियों का लगातार लॉन्च और वितरण संभव होता है, जिससे एक ही ग्राहक संबंध से विभिन्न राजस्व स्रोतों का निर्माण होता है।

डी.आर.एच.पी एक ऐसा बिज़नेस मॉडल पेश करता है, जिसमें पी2पी और मर्चैंट पेमेंट्स सहित पेमेंट के लेन-देन यूज़र्स को इस तरह से जोड़कर रखते हैं, जिससे विभिन्न श्रेणियों में सेवा वितरण, लेन-देन के शुल्क, प्लेटफॉर्म शुल्क और कमीशन द्वारा अनेक राजस्व स्रोतों का निर्माण होता है। लेन-देन का हर प्रकार और सेवा श्रेणी विशाल ईकोसिस्टम में राजस्व का विशेष अवसर प्रदान करते हैं। 

चुनौतियाँ एवं महत्व
डी.आर.एच.पी ने फोनपे के राजस्व मॉडल और विकास मार्ग की रूपरेखा पेश की है, पर निम्नलिखित बातों पर गौर करना भी जरूरी है:
    प्रतिस्पर्धी तीव्रता: भारत में डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है। इसमें गूगल पे, पेटीएम एवं अन्य फिनटेक कंपनियाँ मजबूत फंडिंग के साथ कड़ी टक्कर दे रही हैं। इसलिए इस प्रतियोगी माहौल में यूज़र्स को जोड़े रखने और मर्चैंट रिलेशनशिप बनाए रखने के लिए लगातार निवेश की जरूरत है।
    नियामक वातावरण: पेमेंट और फाइनेंशियल सेवाओं का क्षेत्र विकसित हो रहे नियमों के अधीन है। यूपीआई इंटरचेंज फीस, डेटा लोकलाईज़ेशन की जरूरतें, या डिजिटल लेंडिंग के नियमों में बदलाव बिज़नेस मॉडल और लाभ को प्रभावित कर सकते हैं।
    फाइनेंशियल सेवाओं का विस्तार: लेंडिंग और इंश्योरेंस में वृद्धि तो हुई है, पर ये सेगमेंट भुगतान व्यवसाय के मुकाबले छोटे हैं। फाइनेंशियल सेवाओं के विस्तार के लिए विभिन्न क्षमताओं की जरूरत है, जिनमें क्रेडिट रिस्क मैनेजमेंट, रैगुलेटरी अनुपालन और वित्तीय संस्थानों के साथ साझेदारी शामिल है। 
    कमाई की चुनौतियाँ: ग्राहकों को लगातार जोड़े रखने वाले फीचर्स हमेशा राजस्व में तब्दील हों, ऐसा जरूरी नहीं है। ग्राहकों को जोड़े रखकर नई श्रेणियों में कमाई करने की क्षमता बहुत जरूरी है।
    टेक्नोलॉजी और इन्फ्रास्ट्रक्चर की लागत: प्रतिदिन लाखों लेन-देन की प्रोसेसिंग करने वाले प्लेटफॉर्म को चलाने के लिए जबरदस्त टेक्नोलॉजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और साईबरसिक्योरिटी में भारी निवेश की जरूरत होती है। इन स्थिर लागतों को राजस्व बढ़ाकर संतुलन बनाना बहुत जरूरी होता है।
फोनपे मॉडल की सफलता इस बात पर निर्भर होगी कि कंपनी इन चुनौतियों को किस प्रकार संभालते हुए विभिन्न राजस्व स्रोतों का विस्तार करेगी तथा इस गतिशील और प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी स्थिति कैसे बनाए रखेगी।

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