भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी मरम्मत खुद करने वाला पदार्थ विकसित किया

Edited By Updated: 24 Jul, 2021 07:55 PM

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नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) वैज्ञानिकों ने ‘पीजोइलेक्ट्रिक’ आणविक क्रिस्टल विकसित किया है, जो किसी बाहरी सहायता के बगैर अपनी यांत्रिक टूट-फूट की खुद से मरम्मत कर सकता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग(डीएसटी) ने शनिवार को यह जानकारी दी।

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) वैज्ञानिकों ने ‘पीजोइलेक्ट्रिक’ आणविक क्रिस्टल विकसित किया है, जो किसी बाहरी सहायता के बगैर अपनी यांत्रिक टूट-फूट की खुद से मरम्मत कर सकता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग(डीएसटी) ने शनिवार को यह जानकारी दी।
पीजोलेक्ट्रिक क्रिस्टल ऐसे पदार्थ हैं, जो किसी यांत्रिक प्रभाव में आने पर विद्युत उत्पन्न करते हैं।
ऐसे उपकरण जिनका प्रतिदिन उपयोग किया जाता है, वे अक्सर यांत्रिक रूप से गड़बड़ हो जाते हैं। इससे उपकरण का सेवा काल घट जाता है और उसके रखरखाव का खर्च बढ़ जाता है। अंतरिक्षयान जैसे मामलों में, टूट-फूट को ठीक करने के लिए मानवीय हस्तक्षेप संभव नहीं होता है।
डीएसटी ने एक बयान में कहा, ‘‘इस तरह की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान(आईआईएसईआर), कोलकाता ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के सहयोग से पीजोइलेक्ट्रिक आणविक क्रिस्टल विकसित किया है, जो अपनी यांत्रिक टूट-फूट की मरम्मत बगैर किसी बाहरी सहायता के खुद से कर सकता है।’’


यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

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