चाणक्य नीति: ऐसे लोग करते हैं दूसरों से ईर्ष्या, बनाकर रखें दूरी

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Tuesday, October 04, 2016-10:11 AM

आचार्य चाणक्य ने  अपने जीवन से प्राप्त अनुभवों का उल्लेख ‘चाणक्य नीति’ में किया। चाणक्य नीति 17 अध्यायों का ग्रंत हैं। आचार्य चाणक्य को राजनीति एवं कूटनीति में संपन्न अौर अर्थशास्त्र के विद्वान माना जाता है। उन्होंने अपने ज्ञान को स्वयं तक सीमित न रखकर चाणक्य नीति में लिखकर अपनी आने वाली पीढ़ियों को दिया। उनकी नीतियां जीवन में मुसीबतों से छुटकारा पाने के लिए प्रयोग की जा सकती हैं। 

 

* बुद्धिहीन लोग बुद्धिमानों से, गलत मार्ग पर चलने वाली स्त्री पवित्र महिला से ईर्ष्या करती है। इसी प्रकार बदसूरत औरत खुबसूरत स्त्री से जलन करती है।

 

* आदमियों में नाई, कौआ पक्षियों में, लोमड़ी प्राणियों अौर अौरतों में भ्रष्ट महिला चतुर होती है।

 

* चाणक्य के अनुसार बेर के झाड़ के सभी बेर एक से नहीं रहते। उसी प्रकार एक ही गर्भ अौर नक्षत्र में पैदा होने वाले व्यक्ति भी एक जैसे नहीं होते।

 

* जो वैदिक ज्ञान की निंदा करते हैं, शास्त्र सम्मत जीवन शैली अौर शांतिपूर्ण स्वभाव के लोगों का मजाक उड़ाते हैं ऐसे लोग दुःख को प्राप्त होते है।

 

* गरीब को धन, पशु को वाणी, लोगों को स्वर्ग अौर देव लोगों को मुक्ति की कामना होती है।

 

* वासना की भांति कष्टकर कोई रोग, मोह के समान शत्रु , गुस्से की तरह अग्नि अौर स्वरूप ज्ञान के समान कोई बोध नहां है।


 


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