भैया दूज: शुभ मुहूर्त में लगाएं भाई को तिलक जानें, शास्त्रीय विधि और मंत्र

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Tuesday, November 01, 2016-7:11 AM

भाई-बहन के परस्पर प्रेम तथा स्नेह का प्रतीक त्यौहार भैया दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को दीपावली के बाद पूरे देश में आदिकाल से मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उनके उज्ज्वल भविष्य व उनकी लम्बी उम्र की कामना करती हैं।

 

भैया दूज कथा: भाई-बहन एक साथ पढ़ें...


भैया दूज वाले दिन आसन पर चावल के घोल से चौक बनाएं। इस चौक पर भाई को बिठाकर बहनें उनके हाथों की पूजा करती हैं। सबसे पहले बहन अपने भाई के हाथों पर चावलों का घोल लगाती है। उसके ऊपर सिंदूर लगाकर फूल, पान, सुपारी तथा मुद्रा रख कर धीरे-धीरे हाथों पर पानी छोड़ते हुए मंत्र बोलती है ‘गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को। सुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें।’ 


इसके उपरांत बहन भाई के मस्तक पर तिलक लगाकर कलावा बांधती है तथा भाई के मुंह मिठाई,  मिश्री माखन लगाती है। घर पर भाई सभी प्रकार से प्रसन्नचित्त जीवन व्यतीत करे, ऐसे मंगल कामना करती है। उसकी लम्बी उम्र की प्रार्थना करती है। उसके उपरांत यमराज के नाम का चौमुखा दीपक जला कर घर की दहलीज के बाहर रखती है जिससे उसके घर में किसी प्रकार का विघ्न-बाधाएं न आएं और वह सुखमय जीवन व्यतीत करे।


भाई दूज टीका मुहूर्त- 13:11 से 15:21

अवधि- 2 घण्टे 9 मिनट

द्वितीय तिथि प्रारम्भ- 1 नवम्बर 2016 को 01:39 बजे
द्वितीय तिथि समाप्त- 2 नवम्बर 2016 को 04:11 बजे


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