वास्तुशास्त्र: नवग्रह डालते हैं तन, मन और धन पर प्रभाव

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Friday, February 17, 2017-12:50 PM

वास्तुशास्त्र के अनुसार गृहनिर्माण किया जाता है तब उसके साथ-साथ घर में नवग्रह भी विराजमान होते हैं जो वहां रहने वाले लोगों पर अपना प्रभाव डालते हैं।
सूर्यदेव का स्थान
उत्तर पूर्व (ईशान कोण) में पूजा या प्रार्थना कक्ष में होता है एवं ये घर में रहने वाले व्यक्तियों के स्वास्थ्य एवं नौकरी पर प्रभाव डालते हैं।


चंद्रदेव का स्थान
पूर्व दिशा में स्नानागार या स्नान कक्ष (बाथरूम) होता है तथा यह ग्रह स्वामी के यश व कीर्ति पर प्रभाव डालते हैं।

 

मंगल देव अथवा कुल देव का स्थान
दक्षिण पूर्व (आग्नेय कोण) में रसोई (किचन) में होता है एवं यह व्यक्ति के चरित्र, बुद्धि, धन व समृद्धि पर प्रभाव डालते हैं।


बुध देव का स्थान
घर के सामने के बरामदे या स्वागत कक्ष या मध्य के हाल में जहां अध्ययन एवं व्यापार के कार्य होते हैं वहां बुध देव का निवास होता है। यह व्यक्ति के व्यापार एवं धंधे तथा कार्य पर प्रभाव डालते हैं।


बृहस्पति देव या गुरु का स्थान
उत्तर दिशा में या उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) जहां आध्यात्मिक व अन्य तरह का अध्ययन होता है वहां बृहस्पति देव या गुरु का निवास होता है। गुरु व्यक्ति के मान-सम्मान पर प्रभाव डालते हैं।


शुक्र देव का स्थान
दक्षिण से लेकर पश्चिम तक के क्षेत्र में जहां पर भोजन कक्ष, प्रसाधन कक्ष या विश्राम कक्ष आदि में शुक्र का स्थान होता है शुक्र व्यक्ति की वाकपटुता एवं पति, पत्नी के संबंधों व व्यवहार पर प्रभाव डालते हैं।


शनि देव का निवास स्थान
पश्चिम या पश्चिम-उत्तर के किनारे पर गौशाला में होता है। शनि देव व्यक्ति की प्रसन्नता व अचल सम्पत्ति व धार्मिक बुद्धि पर प्रभाव डालते हैं।


राहू एवं केतु के स्थान
घर के प्रवेश द्वार के दाहिनी तरफ राहू का स्थान एवं बाईं तरफ केतु का स्थान होता है तथा ये भवन के चारों ओर रह कर उसकी रक्षा करते हैं। राहू व्यक्ति की प्रतिष्ठा एवं मानसिक स्थिति व पेट के विकारों पर असर डालता है तथा केतु पीड़ा, धन की वृद्धि व सम्पन्नता पर प्रभाव डालता है।


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