पुरुषों की कुछ इच्छाएं कभी परवान नहीं चढ़ती, जीवनकाल में कभी नहीं भोग सकते ये सुख

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Monday, November 07, 2016-7:52 AM

श्रीरामायण में श्रीहरि विष्णु के अवतार भगवान राम और उनके कुल का संपूर्ण जीवन वृतांत अंकित है। जिसमें विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से आम जनमानस के लिए बहुत सारे संदेश दिए गए हैं। जिन्हें अपनाकर जीवन में सुख और वैभव पाया जा सकता है। रामायण के अरण्य कांड में एक प्रसंग आता है ज‌िसमें रावण की प्रिय बहन शूर्पणखा श्रीराम और उनके अनुज लक्ष्मण को शादी का प्रस्ताव देती है। वह दोनों उसका प्रस्ताव अस्वीकार कर देते हैं। उस समय तीनों में वार्तालाप होता है। जिसके अनुसार पुरुषों की कुछ इच्छाएं कभी परवान नहीं चढ़ती और इनमें धन से जुड़ी चीजें भी शुमार हैं।


लक्ष्मण जी को साधन बनाकर श्रीरामायण में कहा गया है, क‌ि कुछ ऐसे लोग हैं जो अपने जीवनकाल में कभी धन का सुख नहीं भोग सकते। आईए जानें कौन से हैं वो लोग


* नशा एक ऐसी लत है, जो व्यक्ति को दीमक की भांति अंदर से खोखला कर देता है। जिस व्यक्ति में किसी भी तरह का नशा करने की आदत है वह कभी धनवान नहीं बन सकता। अपने नशे की लत को पूरा करने के लिए वह अपनी और पूर्वजों की कमाई को मिट्टी में मिला देता है।


* सबसे बड़ा नशा धन का होता है। किसी भी तरह का नशा तो दो-चार घंटे बाद ही उतर जाता है लेकिन धन का नशा तो जिंदगी बर्बाद करने के बाद ही उतरता है। धन का अहंकार रखने वाले हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि पैसा कुछ भी हो सकता है, बहुत कुछ हो सकता है लेकिन सब कुछ नहीं हो सकता। हर आदमी को धन की अहमियत समझना बहुत जरूरी है। धनाढ्य होने के बाद भी यदि लालच और पैसों का मोह है तो उससे बड़ा गरीब और कोई नहीं हो सकता है। प्रत्येक व्यक्ति लाभ की कामना करता है लेकिन उसका विपरीत शब्द अर्थात ‘भला’ करने से दूर भागता है।

 
* पति अथवा पत्नी अपने जीवनसाथी के साथ बेईमानी करके किसी अन्य से संबंध स्थापित करते हैं तो उनका लोक और परलोक दोनों दुर्गति को प्राप्त होते हैं।


* लोभ सबसे बड़ा अवगुण है, पर निंदा सबसे बड़ा पाप है, सत्य सबसे बड़ा तप है और मन की पवित्रता सभी तीर्थों में जाने से उत्तम है । सज्जनता सबसे बड़ा गुण है, यश सबसे उत्तम अलंकार (आभूषण) है, उत्तम विद्या सबसे श्रेष्ठ धन है और अपयश मृत्यु के समान सर्वाधिक कष्टकारक है। 


* घमंडी व्यक्ति के पास कभी भी धन नहीं रूकता। रावण, दुर्योधन, कंस, राजा बल‌ि इस  के उदाहरण हैं। जब अहंकार नहीं होता तो आदमी ऊपर की तरफ उठने लगता है, जैसे आकाश की कोई कशिश, कोई आकर्षण।


* जो व्यक्ति किसी का नौकर होता है, वह कभी धनवान नहीं बन सकता। उसके पास बेशुमार दौलत हो सकती है लेकिन उसके सुख और खुशी की चाबी उसके मालिक के पास होती है। वह उनकी कृपा पर ही अपना जीवन व्यतित करते हैं।


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