फैसला आपका: पुनर्जन्म की बात, सच है या झूठ

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Thursday, November 17, 2016-11:52 AM

हिन्दू धर्म में कर्म के सिद्धांत पर जोर दिया गया है। जैसा कर्म, वैसा फल कहा गया है, अतएवं हमें सत्कर्म करना चाहिए। कर्मों के अनुसार ही अगला जन्म मिलता है। एक के बाद दूसरा जन्म मिलता है। इस पुनर्जन्म की धारणा के अनेक पक्षधर हैं। विश्व भर में अनेक घटनाएं सामने आती हैं। मात्र एक-दो धर्म विश्व में ऐसे हैं जो पुनर्जन्म को नहीं मानते।

 

यह पुनर्जन्म का सिद्धांत भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी देन है। भारतीय धर्मग्रंथों ने आत्मा अमर है, इसे हर जगह व्याख्यायित किया है। सबको अपने पूर्वजन्म की स्मृति याद नहीं रहती पर मात्र इसके कारण इस पुनर्जन्म की धारणा को अप्रमाणिक नहीं कहा जा सकता।

 

पुनर्जन्म को पुष्ट करने वाली अनेक घटनाएं विश्व भर में सप्रमाण सामने आती रहती हैं। पाश्चात्य देशों ने ऐसी घटनाओं की जांच-पड़ताल कर उसे सही पाया है। चकित कर देने वाले तथ्य भी सामने आए हैं।

 

हिन्दू धर्म में पुनर्जन्म के कुछ कारण बताए गए हैं यथा भगवान की आज्ञा से, पुण्यक्षय हो जाने से, पुण्य का फल भोगने के लिए, पाप का फल भोगने के लिए, बदला लेने के लिए, बदला चुकाने (प्रत्युपकार करने) के लिए, अकाल मृत्यु हो जाने पर, अपूर्ण कार्यों को पूर्ण करने के लिए आदि। स्मृति सहित पुनर्जन्म की जो घटनाएं सामने आती हैं वे यही प्रमाणित करती हैं।

 

गीता, कठोपनिषद, मुण्डकोपनिषद, वृहदारण्य कोपनिषद, ईशावास्योपनिषद, चाणक्य सूत्र आदि ग्रंथ इससे भरे हैं। ज्ञानापवि, महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक, जर्मन ऋषि शोपेनहावर, स्वेट मार्डेन, सुकरात, महाकवि गेटे, संत तुलसीदास, कालिदास आदि ने पुनर्जन्म की धारणा का पक्ष लेते उस पर विस्तृत व्याख्या कर प्रकाश डाला है।

 

उपरोक्त महापुरुषों के अनुसार वस्त्र की भांति आत्मा उसके विकल्प में दूसरा शरीर ढूंढ लेती है। पुराने कपड़े की भांति पुराना शरीर छोड़ देती है। पैदा हुए की मृत्यु और मरे हुए का जन्म निश्चित है। शरीर की प्रकृति मृत्यु और उसकी विकृति जन्म है। पूर्व में जन्म के लेखा-जोखा अनुसार मनुष्य दूसरा शरीर प्राप्त कर लेता है। आत्मा एक चेतन तत्व है। जो एक देह से दूसरा देह ढूंढती रहती है।

 

पुनर्जन्म के सिद्धांत की व्यपकता

* हिन्दू धर्म के सभी ग्रंथ पुनर्जन्म के सिद्धांत को मानते एवं प्रतिपादित करते हैं।

* बौद्ध और जैन दर्शन भी इसे स्वीकारते हैं।

* प्राचीन मिस्र में भी इस सिद्धांत को माना जाता था।

* यूनान के सभी प्रमुख प्राचीन दार्शनिक इससे सहमत थे।

* रोमन भी इसे स्वीकारते थे जो वहां की प्राचीन रचनाओं में वर्णित है।

* पुराने यूरोप की सभी जातियों में पुनर्जन्म पर विश्वास किया जाता था।

* अमेरिका के रैड इंडियन, जापानी, चीनी, तिब्बती, बर्मी लोग भी इसे मानते हैं।

* मैक्सिको में यह विश्वास प्राचीन काल से प्रचलित हैं।

* सीरियन भी पुनर्जन्म पर विश्वास रखते हैं।

* विश्व के सभी प्राचीन विचारकों, दार्शनिकों एवं लेखकों ने पुनर्जन्म की धारणा को पुष्ट करते हुए उसके पक्ष में लिखा है।

* मैक्समूलर ने भी उस सिद्धांत को माना है।

* यहूदी भी प्राचीन काल से इस पर सहमत हैं।

* ईसा मसीह ने इसे स्वीकारते हुए शिष्यों से कहा था-जान बैपटिस्ट वस्तुत: एलिजा है।    
 


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