शरद पूर्णिमा: काम से पाएं मुक्ति, जानें शुभ मुहूर्त

  • शरद पूर्णिमा: काम से पाएं मुक्ति, जानें शुभ मुहूर्त
You Are HereDharm
Wednesday, October 04, 2017-3:16 PM

पूरे वर्ष में केवल शरद पूर्णिमा को, वृन्दावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में प्रभु के हाथों में मुरली शोभायमान होती है। शरद पूर्णिमा की रात्रि में दर्शनों का विशेष महत्व है। इस दिन चन्द्रमा की किरणों से अमृत-तत्त्व बरसता है। चन्द्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ पृथ्वी पर शीतलता, पोषकशक्ति एवं शांतिरूपी अमृतवर्षा करता है। आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो चन्द्र का मतलब होता है शीतलता। बाहर कितने भी परेशान करने वाले प्रसंग आएं लेकिन आपके दिल में कोई फरियाद न उठे। आप भीतर से ऐसे पुष्ट हो कि बाहर की छोटी-मोटी मुसीबतें आपको परेशान न कर सकें। इस दिन व रात में खूब मन्त्र जाप करें। रात्रि को चंद्रमा के नीचे खुली आंखों से चंद्रमा को निहारते हुए गोपी गीत का पाठ करना चाहिए।


इस रात को जो रस बरसता है वो दुर्लभ होता है। कोई और विचार मन में न आएं अपना मन्त्र अन्दर चलता रहे आज के दिन व रात जो प्रणय गीत ,वेणु गीत ,गोपी गीत, भ्रमर गीत ,युगल गीत,का पाठ करता है व रास की दिव्य चर्चा का अध्यात्मिक अर्थ समझ कर ह्रदय में महारास का ध्यान करता है निश्चित ही उसको दिव्य अनुभूतियां होती हैं। 


भगवत के रास पंचाध्यायी के 5 अध्याय भगवान के पांच प्राण है। गोपी गीत भगवान का ह्रदय हैं इसलिए जितना हो सके गोपी गीत का पाठ करो चंद्रमा की अमृतरूपी किरणों के नीचे बैठ कर या लेट कर। इन पांच गीतों के पाठ से ह्रदय के रोग दूर होते हैं। कामवासना का बीज भून देता है गोपी गीत का पाठ। घर की छत पर परिवार सहित बैठो व जप करो हो सके तो रात भर वहीं लेट जाओ । नाभि पर चंद्रमा की किरने पड़ने दो। 


जितना हो सके जप करें 9 बजे से 12 बजे रात तक शुभ मुहूर्त है। इस दौरान खीर को चांद की रोशनी में रखें।


लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त:
सिद्धि मुहूर्त:
शाम 5 बजे से लेकर 57 मिनट तक, रात्रि 7 बजे से 49 मिनट तक।
अमृत मुहूर्त: रात 7 बजे से लेकर 50 मिनट तक, रात्रि 9 बजे से 17 मिनट तक।

यहाँ आप निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, भारत मॅट्रिमोनी के लिए!

Recommended For You