रविवार को ऐश के साथ चाहते हैं कैश तो जरा ध्यान दें...

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Saturday, November 12, 2016-8:13 AM

सूर्य ही कालचक्र के प्रणेता हैं, सूर्य से ही दिन-रात्रि, घटी, पल, मास, अयन तथा संवत् आदि का विभाग होता है। सूर्य संंपूर्ण संसार के प्रकाशक हैं। इनके बिना सब अंधकार है। सूर्य ही जीवन, तेज, ओज, बल, यश, चक्षु, आत्मा और मन हैं।


वेदों, पुराणों व शास्त्रों में योग साधना में सूर्य नमस्कार का वर्णन मिलता है। सर्व शक्ति मान होने के साथ पूजा-अर्चना, आराधना एवं उपासना करने से भगवान सूर्य देव प्रसन्न हो जाते हैं। सूर्य की कृपा पाने के लिए आदित्य हृदय स्त्रोत, सूर्य चालीसा का पाठ व दक्षिणावृत्ति या गौमुखी शंख से अर्ध्य चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से जन्म पत्रिका या हस्तरेखा में सूर्य निर्बल होने पर भी लाभकारी बन जाता है।

 
सूर्य पूजा का रविवार के दिन खास महत्व है। धार्मिक दृष्टि से सूर्यदेव जगत की रचना, पालन व संहार करने वाले परब्रह्म स्वरूप पंचदेवों में एक हैं। सूर्य पूजा यश, प्रतिष्ठा, सेहत और खुशहाली देने वाली मानी गई है। रविवार के दिन सूर्य को नित्य रक्त पुष्प डाल कर अर्ध्य दिया जाता है। अर्ध्य द्वारा विसर्जित जल को दक्षिण नासिका, नेत्र, कान व भुजा को स्पर्शित करें।

 

इसके अतिरिक्त जरा ध्यान दें...

* बहिखाते पर केसर के छींटे दें।


* सुखी व समृद्ध रहने के लिए सूर्य नक्षत्र में उस पेड़ की टहनी तोड़ें जहां चमगादड़ों का स्थाई निवास हो। उस टहनी को अपने तकिए के नीचे रख कर सोएं।

 

* सुबह उगते सूरज के दर्शन करने से दिन दोगुनी, रात चौगुनी तरक्की होती है।

 

जो उपासक ऐसे उन भगवान सूर्य की उपासना करते हैं, उन्हें मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। उपासक के सम्मुख उपस्थित होकर भगवान सूर्य स्वयं अपने उपासक की इच्छापूर्ति करते हैं। उनकी कृपा से मनुष्य के मानसिक, वाचिक तथा शारीरिक सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

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