‘जमानत पर छूटने पर किया फिर अपराध’ छूटती नहीं काफिर मुंह को लगी हुई!

Edited By Updated: 14 Jul, 2026 03:50 AM

committed crime again after being released on bail

जेलों को ‘सुधार घर’ भी कहा जाता है और इसी कारण यह उम्मीद भी की जाती है कि अपनी सजा भुगत कर या जमानत मिलने पर जेल से निकलने वाले आरोपी के आचरण में सकारात्मक बदलाव आ चुका होगा और वह अपराध की दुनिया को अलविदा कह कर एक अनुशासित नागरिक की भांति आगे का...

जेलों को ‘सुधार घर’ भी कहा जाता है और इसी कारण यह उम्मीद भी की जाती है कि अपनी सजा भुगत कर या जमानत मिलने पर जेल से निकलने वाले आरोपी के आचरण में सकारात्मक बदलाव आ चुका होगा और वह अपराध की दुनिया को अलविदा कह कर एक अनुशासित नागरिक की भांति आगे का जीवन बिताएगा। लेकिन कई मामलों में जेल से बाहर आने के बाद भी कई अपराधियों की लत छूटती नहीं और वे अपना पहले वाला आपराधिक आचरण जारी रखते हैं जिसकी पिछले मात्र एक सप्ताह की घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :

* 6 जुलाई को ‘अलीगढ़’ (उत्तर प्रदेश) में 20 से अधिक मुकद्दमों में नामजद शातिर अपराधी ‘दिनेश’ ने जेल से जमानत पर छूट कर बाहर आने के 10 दिन बाद पुरानी रंजिश और विवाद के कारण अपनी पत्नी की मायके से विदाई करा कर अपने घर लाते समय रास्ते में ‘सिया रफीपुर’ के खेतों में ले जाकर गोली मार कर उसकी हत्या कर दी।

* 6 जुलाई को ही ‘जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड’ ने पहले ही हत्या के एक मामले में जमानत पर रिहा एक 16 वर्षीय किशोर को हत्या के एक अन्य मामले में संलिप्त पाए जाने पर उस पर वयस्क की भांति मुकद्दमा चलाने के आदेश दिए। 
* 7 जुलाई को ‘करनाल’ (हरियाणा) पुलिस के ‘एंटी ऑटो व्हीकल थैफ्ट स्टाफ’ ने दुपहिया वाहनों की चोरी करने वाले एक शातिर अपराधी को गिरफ्तार करके 5 मोटरसाइकिल और 1 एक्टिवा बरामद की। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी कुछ दिन पहले ही चोरी के एक अन्य मामले में जमानत पर जेल से बाहर आया था और बाहर आते ही उसने दोबारा वाहन चोरी का धंधा शुरू कर दिया। 

* 7 जुलाई को ही सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक आरोपी को ‘इलाहाबाद हाई कोर्ट’ द्वारा दी गई जमानत यह कहते हुए पूरी तरह पलट दी कि जमानत का इस्तेमाल समाज में दहशत फैलाने के लिए नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट के अनुसार, जांच में पाया गया कि आरोपी ने जमानत पर बाहर आते ही उस पर चल रहे हत्या के मुकद्दमे के मुख्य गवाहों और पीड़ित परिवार को हथियार (कट्टा) दिखाकर डराया-धमकाया और अपने विरुद्ध शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। 
* 7 जुलाई को ही ‘नागपुर’ (महाराष्ट्र) में पुलिस ने सर्राफा की दुकानों पर चोरी करने में माहिर ‘मोनाली’ नामक महिला को जमानत पर रिहा होने के कुछ ही समय बाद एक सर्राफ के यहां से पौने 13 लाख रुपयों के गहने चुराने के आरोप में फिर गिरफ्तार किया।
* 8 जुलाई को ‘फरीदाबाद’ (हरियाणा) में अपराध शाखा की टीम ने चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया। वह 2026 में ही चोरी के एक पुराने मामले में जमानत पर जेल से बाहर आया था। 
* 10 जुलाई को ‘विकासनगर’ (उत्तराखंड) के ‘ढकरानी’ स्थित सोलर प्लांट से 600 मीटर कॉपर वायर चोरी होने का मामला सामने आया। पुलिस ने इस मामले में 27 वर्षीय आरोपी ‘जब्बार’ को चोरी के लगभग 80,000 रुपए के सामान के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया। वह 2023 में भी वाहन चोरी के आरोप में जेल गया था और फिलहाल जमानत पर था। 

* 11 जुलाई को ‘रंगारैड्डी’ (तेलंगाना) जिले में ‘लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण’ (पोक्सो) के अंतर्गत दर्ज मामले में 35 वर्षीय आरोपी ने जमानत मिलने पर जेल से बाहर आते ही 6 लोगों की हत्या कर दी। सबसे पहले वह ‘शाबाद’ कस्बे में गया और वहां पीड़िता की मां और नानी की हत्या कर दी। इसके बाद वह नाबालिग पीड़िता को अपने पैतृक गांव ले कर गया और चाकू घोंप कर उसकी हत्या करने के बाद अपने घर आकर अपनी 30 वर्षीय पत्नी तथा 2 मासूम बेटों को मार डाला। उक्त घटनाओं ने देश भर में जमानत तथा पैरोल के नियमों और गवाहों की सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। इससे तो यही लगता है कि हमारी जेलें अपराधियों को सुधारने में नाकाम सिद्ध हो रही हैं। अत: इस सम्बन्ध में अपराधियों के साथ-साथ जेल प्रबंधन पर भी कड़े कदम उठाने की तुरंत जरूरत है।-विजय कुमार

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