‘जेल परिसरों से कैदियों की फरारी’ अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत!

Edited By Updated: 29 Oct, 2026 02:22 AM

escape of prisoners from prison premises

घोर अव्यवस्था की शिकार भारतीय जेलों से 2024 में 178 कैदी फरार हुए। इनमें से 39 कैदी जेलों के अंदर से, 65 कैदी पुलिस हिरासत से और 74 कैदी जेलों के बाहर से फरार हुए।

घोर अव्यवस्था की शिकार भारतीय जेलों से 2024 में 178 कैदी फरार हुए। इनमें से 39 कैदी जेलों के अंदर से, 65 कैदी पुलिस हिरासत से और 74 कैदी जेलों के बाहर से फरार हुए। यह दुष्चक्र अभी भी रुका नहीं है तथा जेलों में विभिन्न आरोपों में बंद  कैदियों के फरार होने की वारदातें लगातार जारी हैं जो इस वर्ष सामने आई निम्न चंद घटनाओं से स्पष्ट है :

* 2 जनवरी को ‘हजारीबाग’ (झारखंड) स्थित हाई सिक्योरिटी जेल, जहां अनेक नक्सली तथा हाई प्रोफाइल कैदी बंद हैं, से अपनी कोठरी की खिड़की की छड़ें काट कर ‘पोक्सो एक्ट’ (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम) तथा ‘सामूहिक बलात्कार’ के आरोप में बंद 2 कैदी भाग निकले। 
* 4 जनवरी को ‘अनौगी’ (कन्नौज, उत्तर प्रदेश) स्थित जिला जेल में चोरी तथा ‘पोक्सो एक्ट’ (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम) के अधीन बंद  2 विचाराधीन कैदी अपनी बैरक के बाथरूम की खिड़की का सरिया तोड़कर बाहर निकले और फिर जेल के कंबलों और चादरों को आपस में बांधकर एक लंबी रस्सी बना कर दीवार फांद कर फरार हो गए। 
भागने के दौरान दीवार से गिरने के कारण एक कैदी घायल हो गया, जिसे पुलिस ने पकड़ लिया, परंतु दूसरा कैदी हाथ नहीं आया। इस लापरवाही के लिए जेलर और डिप्टी जेलर सहित 5 अधिकारियों को सस्पैंड किया गया।

* 17 फरवरी को ‘जम्मू बाल सुधार गृह’ में बंद 2 पाकिस्तानी बाल कैदी और एक भारतीय कैदी पिस्तौल से ताबड़तोड़ गोलियांं चलाते हुए भाग निकले  जिनमें से 2 को बाद में पकड़ लिया गया। कैदियों के हमले से एक एस.पी.ओ. ‘विनय कुमार’ व हैड कांस्टेबल ‘प्रवीण कुमार’ घायल हो गए। 
* 28 मार्च को ‘रेवाड़ी’ (हरियाणा) के ‘फिदेड़ी गांव’ में नवनिर्मित हाईटैक जिला जेल की सुरक्षा में सेंध लगाकर उत्तर प्रदेश के 2 विचाराधीन कैदी ‘जाहिद’ और ‘फैजान’ सीढ़ी की सहायता से दीवार फांद कर फरार हो गए जिन्हें पुलिस ने बाद में दोबारा गिरफ्तार कर लिया। 
* 22 जून को सुबह के समय ‘बरेली’ (उत्तर प्रदेश) की सैंट्रल जेल में ‘पोक्सो एक्ट’ और बलात्कार के आरोप में बंद उम्रकैद की सजा काट रहा कैदी ‘दिनेश कुमार’ जेल परिसर के एग्रीकल्चर फार्म में काम करने के दौरान वहां तैनात 10 सुरक्षा कर्मियों की आंखों में धूल झोंक कर फरार हो गया। 
* 26 सितम्बर को देर शाम ‘अररिया’ (बिहार) की जिला जेल में चोरी के आरोप में बंद एक कैदी सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों को चकमा देकर जेल की छत तक जा पहुंचा और वहां से पानी की प्लास्टिक पाइप के सहारे नीचे उतर कर दीवार फांद कर भाग गया। 
* 22-23 अक्तूबर को ‘चेन्नई’ (तमिलनाडु) की हाई-सिक्योरिटी वाली ‘पुझल’ जेल से लगातार 2 दिनों में 2 अलग-अलग कैदी फरार हो गए।

* और अब 26 अक्तूबर को ‘थेनी’ (तमिलनाडु) जिले की ‘थेक्कमपट्टी’ सब-जेल में 17 विचाराधीन कैदियों ने अपने एक साथी को ‘मिर्गी का दौरा’ पडऩे का नाटक करवाया और जैसे ही जेल सुरक्षाकर्मी मदद के लिए दरवाजा खोलकर अंदर गए, तो कैदियों ने उन पर हमला कर दिया और स्वयं फरार हो गए। इस घटना में जेल के चंद सुरक्षाकर्मी भी घायल हो गए। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जंगल और झाडिय़ों में छिपे फरार 17 में से 13 कैदियों को दोबारा दबोच लिया। इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में 9 जेल कर्मियों को सस्पैंड कर दिया गया। भारत में जेलों से फरारी की घटनाएं मुख्यत: जेलों की क्षमता से अधिक भीड़, कमजोर बुनियादी ढांचे और त्रुटिपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था के कारण होती हैं। हालांकि ऐसी प्रत्येक घटना के बाद प्रशासन द्वारा सुरक्षा प्रबंध पहले से अधिक मजबूत करने के दावे किए जाते हैं परंतु उन तथाकथित दावों का कोई परिणाम नजर नहीं आता। चूंकि यह सब जेलों में कैदियों की सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों की चूक, लापरवाही या मिलीभगत का ही प्रमाण है, अत: जेलों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, सुरक्षा स्टाफ को अधिक चुस्त करने, जवाबदेह बनाने और  दोषी स्टाफ को कठोर दंड देने की जरूरत है!-विजय कुमार 

Related Story

    Trending Topics

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!