आजम खान के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, 1170 करोड़ रुपए की जौहर यूनिवर्सिटी को किया जब्त

Edited By Updated: 29 Oct, 2026 09:07 AM

ed attaches jauhar university in money laundering case against azam khan

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में, उनके द्वारा प्रमोट की गई उत्तर प्रदेश स्थित 'मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी' की जमीन और इमारतों को जब्त (अटैच) कर लिया है। एजेंसी के अनुसार 'प्रिवेंशन...

नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में, उनके द्वारा प्रमोट की गई उत्तर प्रदेश स्थित 'मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी' की जमीन और इमारतों को जब्त (अटैच) कर लिया है। एजेंसी के अनुसार 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत जब्त की गई ये संपत्तियां पूर्व उत्तर प्रदेश मंत्री से जुड़ी हैं और इनकी मौजूदा बाजार कीमत लगभग 1,170 करोड़ रुपए आंकी गई है। रामपुर स्थित इस यूनिवर्सिटी और इसके कैंपस का मालिकाना हक 'मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट' के पास है जिसकी स्थापना आजम खान ने की थी और वही इसे नियंत्रित करते हैं। वे इस यूनिवर्सिटी के मानद चांसलर भी हैं। 

ED की जांच में सामने आया है कि इस निजी यूनिवर्सिटी के विकास के लिए सरकारी फंड, निर्माण सामग्री और अन्य सार्वजनिक संसाधनों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल (डायवर्जन) किया गया। एजेंसी का दावा है कि कैंपस के निर्माण में हुए खर्च का एक बड़ा हिस्सा वैध स्रोतों से नहीं आया था; इसमें से 426.46 करोड़ रुपए को कथित तौर पर अपराध से हासिल की गई रकम (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) माना गया है। ED ने बताया कि कुल खर्च में से केवल 72.63 करोड़ रुपए ही वैध स्रोतों से आए थे। इसके अलावा, ट्रस्ट ने 12.29 करोड़ रुपए के चंदे को 'पूंजीगत व्यय' (कैपिटल एक्सपेंडिचर) के रूप में दिखाया था, जो जांच में फर्जी पाया गया। 

सरकारी फंड और निर्माण सामग्री का गलत इस्तेमाल 

जांच से पता चला है कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित सरकारी फंड को यूनिवर्सिटी की ओर मोड़ दिया गया। यूनिवर्सिटी के निजी कैंपस में सरकारी फंड से चलने वाली परियोजनाएं पूरी की गईं और जिन ठेकेदारों को सरकारी काम मिले थे, उन्होंने चंदे के रूप में वह पैसा वापस ट्रस्ट को दे दिया। आजम खान 2015 और 2016 में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे और उनके पास शहरी विकास विभाग (अर्बन डेवलपमेंट) का प्रभार था। एजेंसी के अनुसार उत्तर प्रदेश जल निगम, जिसने यूनिवर्सिटी कैंपस में निर्माण कार्य किए थे, उसी विभाग के अंतर्गत आता था।

ED ने बताया कि लोक निर्माण विभाग (PWD) से लगभग 186 करोड़ रुपए के ठेके पाने वाली एक कंपनी के प्रबंध निदेशक (MD) ने कथित तौर पर स्वीकार किया है कि ठेके की कुल रकम का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा यूनिवर्सिटी के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में इस्तेमाल किया गया था। एक अन्य फर्म के साझेदारों ने जांचकर्ताओं को बताया कि वे खान के प्रभाव में काम करते थे और उनकी फर्म ने ट्रस्ट को 40 लाख रुपए का चंदा दिया था। ED ने यह भी आरोप लगाया कि MLA/MLC स्थानीय क्षेत्र विकास निधि का इस्तेमाल करके विश्वविद्यालय के निजी परिसर में 6.6 करोड़ रुपए के काम कराए गए। एजेंसी के अनुसार, ये काम उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा किए गए थे, जिसके प्रमुख उस समय खान थे।

उत्तर प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय परिसर में एक पंडाल, OBC लड़कों के छात्रावास और एक अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के लिए 23.41 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। एजेंसी ने विशेष रूप से पंडाल के निर्माण का जिक्र किया है जिसके लिए 2015 में 12.16 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। ED के अनुसार मूल सरकारी आदेश में यह शर्त थी कि इस ढांचे का स्वामित्व राज्य के संस्कृति विभाग के पास रहेगा। इसमें यह भी कहा गया था कि पंडाल को बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता और इसे राज्य सरकार के उपयोग के लिए मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि 2016 में जारी एक बाद के आदेश के जरिए कथित तौर पर पंडाल का स्वामित्व जौहर विश्वविद्यालय को सौंप दिया गया और इस शर्त को हटा दिया गया कि इसे सरकारी उपयोग के लिए उपलब्ध कराना होगा।

ED ने रामपुर के अजीम नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज 26 FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। इन FIR में आरोप लगाया गया था कि विश्वविद्यालय के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा कर लिया गया था। एजेंसी ने रामपुर जिला प्रशासन की एक जांच रिपोर्ट का भी हवाला दिया जिसमें आरोप लगाया गया था कि सिंघानखेड़ा गांव में 'एनिमी प्रॉपर्टी' (शत्रु संपत्ति) के 45 भूखंडों (जो लगभग 34 एकड़ में फैले हैं) पर विश्वविद्यालय के लिए अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, 'कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी' (शत्रु संपत्ति के संरक्षक) द्वारा ट्रस्ट को दी गई जमीन की लीज रद्द किए जाने के बावजूद यह कब्जा बना रहा। ED ने बताया कि बाद में गृह मंत्रालय के तहत 'कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी' ने जिला प्रशासन के माध्यम से इस जमीन का कब्जा वापस ले लिया।

जांच के दौरान ED ने सरकारी फंड के कथित दुरुपयोग और इससे जुड़ी अनियमितताओं के बारे में उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ जानकारी साझा की। इसके बाद इस महीने की शुरुआत में अजीम नगर पुलिस स्टेशन में खान, ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ एक FIR दर्ज की गई थी। एजेंसी ने बताया कि ED ने 28 अन्य FIRs पर भी कार्रवाई शुरू की है और इनमें से ज्यादातर मामलों में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। आजम खान कई आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल में हैं। इनमें दो पैन कार्ड से जुड़ी धोखाधड़ी के मामले में 10 साल की सजा और 2019 के चुनाव प्रचार के दौरान की गई टिप्पणियों के लिए 2 साल की सजा शामिल है।

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