Edited By Niyati Bhandari,Updated: 28 Oct, 2026 09:43 AM

Karwa Chauth Vrat Katha: करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। जानिए, करवा चौथ क्यों मनाया जाता है, इसकी पौराणिक कथाएं, पूजा की रस्में और व्रत के दौरान रखी जाने वाली सावधानियां।
Karwa Chauth story: करवा चौथ का पावन व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। यह पर्व सुहागिन महिलाओं के मजबूत इच्छाशक्ति और अपने पति के प्रति अगाध प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए पूरा दिन निर्जला व्रत रखती हैं।

करवा चौथ का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह त्योहार पति-पत्नी के रिश्ते में आपसी स्नेह और विश्वास को बढ़ाता है। इस दिन महिलाएं एक साथ एकत्रित होकर हाथों में मेहंदी लगाती हैं और पुजारिन से समूह में करवा चौथ की कथा सुनती हैं। पूजा संपन्न होने के बाद सोने, चांदी या मिट्टी के करवे का आपस में आदान-प्रदान किया जाता है, जिससे प्रेम-भाव बढ़ता है। इसके बाद रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है तथा सास-ससुर व बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया जाता है।

करवा चौथ की पौराणिक कथाएं
साहूकार की बेटी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी के दिन सेठानी, सातों बहुओं और बेटी ने करवा चौथ का व्रत रखा। रात को जब भाई भोजन करने बैठे, तो उन्होंने अपनी बहन को भी खाने के लिए कहा, लेकिन बहन ने चांद निकलने पर अर्घ्य देकर ही भोजन करने की बात कही। अपनी बहन को भूख से व्याकुल देखकर भाइयों ने नगर के बाहर एक पेड़ पर अग्नि जला दी और बहन से कहा कि चांद निकल आया है। भाभियों के मना करने के बावजूद ननद ने भाइयों द्वारा दिखाई गई अग्नि को चांद मानकर अर्घ्य दे दिया और भोजन कर लिया। छल से व्रत भंग होने के कारण भगवान श्री गणेश अप्रसन्न हो गए, जिससे उस लड़की का पति बीमार हो गया और घर का सारा धन बीमारी में चला गया।
जब लड़की को अपनी भूल का अहसास हुआ, तो उसने गणेश जी से क्षमा मांगी और पुनः विधि-विधान से चतुर्थी का व्रत शुरू किया। उसकी सच्ची श्रद्धा और भक्ति देखकर भगवान श्री गणेश प्रसन्न हुए और उसके पति को जीवनदान देकर धन-वैभव से संपन्न कर दिया।
द्विज ब्राह्मण की पुत्री वीरावती की कहानी
एक अन्य कथा के अनुसार, द्विज नामक ब्राह्मण की कन्या वीरावती ने पहली बार मायके में करवा चौथ का व्रत रखा। भूख से व्याकुल वीरावती को देख उसके सात भाइयों ने वट के वृक्ष पर एक लालटेन जलाकर नकली चांद दिखाया और अर्घ्य दिलवा दिया। जैसे ही वीरावती भोजन करने बैठी, पहले कौर में बाल निकला, दूसरे में छींक आई और तीसरे कौर पर ससुराल से पति की मृत्यु की खबर आ गई। विलाप करती वीरावती के सामने माता इंद्राणी प्रकट हुईं और उन्हें 12 माह की चौथ तथा करवा चौथ का व्रत रखने का सुझाव दिया। पूर्ण श्रद्धा से व्रत का पालन करने पर वीरावती के पति को पुनर्जीवन प्राप्त हुआ।
पतिव्रता करवा और मगरमच्छ का प्रसंग
एक समय करवा नाम की पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी किनारे रहती थी। एक दिन स्नान के दौरान एक मगरमच्छ ने उसके पति का पैर पकड़ लिया। पति के पुकारने पर करवा भागी आई और उसने मगरमच्छ को कच्चे धागे से बांध दिया। इसके बाद करवा यमराज के पास पहुंची और मगरमच्छ को नरक में भेजने की मांग की। यमराज द्वारा मगरमच्छ की आयु शेष होने की बात कहने पर करवा ने उन्हें श्राप देने की चेतावनी दी। करवा के पतिव्रत धर्म के डर से यमराज ने मगरमच्छ को यमपुरी भेज दिया और उसके पति को दीर्घायु प्रदान की।
द्रौपदी और भगवान श्रीकृष्ण का संवाद
जब पांडु पुत्र अर्जुन नीलगिरी पर्वत पर तपस्या करने गए, तो द्रौपदी ने चिंतित होकर भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान किया। तब श्रीकृष्ण ने बताया कि माता पार्वती के पूछने पर भगवान शिव ने उन्हें करवा चौथ व्रत का महत्व बताया था, जिसे करने से सुहाग पर आने वाले सभी संकट टल जाते हैं।

करवा चौथ की प्रमुख रस्में और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां
सरगी का सेवन: विवाहित महिलाएं सूर्योदय से पहले जो भोजन ग्रहण करती हैं, उसे सरगी कहा जाता है। इसके बाद पूरे दिन अन्न-जल का त्याग किया जाता है।
पौष्टिक सरगी लें: सरगी के समय जितना हो सके सेहतमंद खाना खाएं और प्रचुर मात्रा में पानी पिएं।
व्रत खोलने के बाद सावधानी: रात को चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलते समय एक साथ भारी भोजन न करें।
दवाइयों व इलाज के दौरान: यदि किसी महिला का कोई मेडिकल ट्रीटमेंट या दवाइयां चल रही हों, तो उन्हें व्रत रखने से बचना चाहिए।
शारीरिक परिश्रम न करें: व्रत के दिन किसी भी प्रकार की भारी एक्सरसाइज या कसरत न करें, इससे शरीर में कमजोरी आ सकती है।
