Edited By Niyati Bhandari,Updated: 27 Oct, 2026 02:44 PM
Karwa Chauth 2026 Puja Thali Essentials: करवा चौथ 2026 पर पूजा थाली में क्या-क्या सामान होना चाहिए? जानिए, शुभ भोग, सुहाग सामग्री और पूजा थाली की पूरी चेकलिस्ट के साथ विधि।
Karwa Chauth 2026 Puja Thali Essentials: करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। हिंदू धर्म में यह व्रत विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। माना जाता है कि जो महिलाएं इस कठिन व्रत का पालन करती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं, जो महिलाएं शादी के बाद पहली बार व्रत रखने जा रही हैं तो इन चीजों का विशेष ध्यान रखें और जानें कि अपनी थाली में क्या-क्या पूजा सामग्री रखनी चाहिए।
करवा चौथ की थाली में जरूर शामिल करें ये चीजें
हिंदू धर्म में करवा चौथ को बहुत ही कठिन और महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। जो महिलाएं शादी के बाद पहली बार व्रत रखने जा रही हैं, वो अपनी थाली में जल व गंगाजल, फूल, मौसमी फल, मिठाइयां, मिट्टी का करवा, तांबे का लोटा, पानी का गिलास, घी का दीया, सिंदूर, चावल और छलनी आदि चीजों को जरूर शामिल करें।

ग्रह योग के अनुसार विशेष भोग
साल 2026 में करवा चौथ के दिन गुरु ग्रह कर्क राशि में और शुक्र ग्रह तुला राशि में विराजमान रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पीली मिठाई (बेसन के लड्डू) गुरु ग्रह से और सफेद मिठाई (नारियल की बर्फी या लड्डू) चंद्रमा से संबंध रखती है। इसलिए इस बार भोग में बेसन के लड्डू और नारियल से बनी मिठाई रखना विशेष शुभ रहेगा। इसके अलावा घर की परंपरा अनुसार हलवा-पूड़ी या अन्य पकवान भी रख सकते हैं।
करवा चौथ करने की विधि :
सूर्योदय से पूर्व सुबह सूर्योदय से पूर्व अर्थात तारों की छांव में सुहागिनें स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर सरगी खाती हैं, जो उन्हें उनकी सास द्वारा भेंट की जाती है। सरगी में मिठाई, फल व सेवइयों के साथ श्रृंगार का सामान भी होता है। संकल्प लेते हुए सुहागिनें यह मंत्र बोलती हैं-
मम् सुख-सौभाग्य पुत्र पौत्रादि सुस्थिर, श्री प्राप्तयै करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।
सरगी खाने के बाद करवाचौथ का निर्जल व्रत आरंभ होता है।
सायंकाल को कथावाचन और थाली बंटाना: शाम को एक नियत समय पर सभी स्त्रियां सोलह श्रृंगार कर एक खुले स्थान पर एकत्रित होती हैं। उनके हाथों में सजी थाली में मीठी व फीकी मट्ठियां, नारियल, फल, कपड़े व शगुन रखा होता है और साथ में पानी से भरी एक गड़वी होती है, जिसमें थोड़े से कच्चे चावल व चीनी के दाने होते हैं। सभी सुहागिनों को कोई बड़ी-बूढ़ी महिला या मंदिर का पुजारी करवा चौथ व्रत की कथा सुनाता है। इसके बाद थालियां बंटाने की रस्म शुरू हो जाती है। इसे करवा खेलना भी कहते हैं।

Karva chauth puja karne ki vidhi: सभी स्त्रियां गोल दायरे में बैठ जाती हैं और अपनी थाली में शुद्ध घी की जोत जलाकर अपनी-अपनी थाली पंक्ति में एक-दूसरे को पकड़ाती जाती हैं और जब उनकी थाली उनके हाथों में आ जाती है तो एक चक्कर पूरा होता है। इस तरह से सभी सात बार थाली बंटाते हुए यह गीत गाती हैं-
वीरा कुडि़ए करवड़ा, सर्व सुहागन करवड़ा,
ए कटी न अटेरीं न, खुंब चरखड़ा फेरीं ना,
ग्वांड पैर पाईं ना, सुई च धागा फेरीं ना,
रुठड़ा मनाईं ना, सुतड़ा जगाईं ना,
बहन प्यारी वीरां, चंद चढ़े ते पानी पीना,
लै वीरां कुडि़ए करवड़ा, लै सर्व सुहागिन करवड़ा।
इसके बाद वे थाली में रखा सामान जिसे ‘बया’ कहते हैं अपनी सास को दे देती हैं व चरण छूकर उनका आशीर्वाद लेती हैं। रात को चन्द्र दर्शन के बाद चन्द्रमा को अर्ध्य दें। फिर अपने जीवनसाथी के हाथ से जल ग्रहण करें। इस विधि से व्रत संपूर्ण होता है।
