प्रधानमंत्री मोदी युवा-विरोधी हैं या युवा-समर्थक

Edited By Updated: 24 Jul, 2026 05:19 AM

is prime minister modi anti youth or pro youth

राहुल गांधी का यह आरोप कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री’ हैं, एक ऐसा राजनीतिक आरोप है, जो तथ्यों की कसौटी पर पूरी तरह बिखर जाता है। सरकारों का मूल्यांकन नारों से नहीं, बल्कि इस आधार पर होता है कि उन्होंने...

राहुल गांधी का यह आरोप कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री’ हैं, एक ऐसा राजनीतिक आरोप है, जो तथ्यों की कसौटी पर पूरी तरह बिखर जाता है। सरकारों का मूल्यांकन नारों से नहीं, बल्कि इस आधार पर होता है कि उन्होंने युवाओं के लिए कितने अवसर पैदा किए। इस कसौटी पर देखें तो नरेंद्र मोदी ने भारत के युवाओं को सशक्त बनाने के लिए शायद किसी भी पूर्व प्रधानमंत्री से अधिक काम किया है।

मोदी सरकार की पूरी सोच एक मूलभूत विश्वास पर आधारित रही है, ‘भारत की जनसांख्यिकीय बढ़त एक ऐतिहासिक अवसर है, जिसे किसी भी कीमत पर गंवाया नहीं जाना चाहिए।’ भारत की लगभग दो-तिहाई आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, लेकिन यह बढ़त हमेशा नहीं रहेगी। इसलिए अगले 2 दशक भारत के लिए निर्णायक हैं। प्रधानमंत्री मोदी लगातार इस बात पर बल देते रहे हैं कि इस सीमित समय में भारत को अपनी युवा आबादी को दुनिया की सबसे कुशल कार्यशक्ति, सबसे बड़े उद्यमी समुदाय और सबसे सशक्त नवाचार शक्ति में बदलना होगा। इस दिशा में पहला बड़ा कदम उच्च शिक्षा के अवसरों का अभूतपूर्व विस्तार रहा। वर्ष 2014 में भारत में लगभग 387 मैडिकल कॉलेज थे। आज उनकी संख्या बढ़कर 780 से अधिक हो चुकी है। एम.बी.बी.एस. सीटें लगभग 51,000 से बढ़कर 1.30 लाख से अधिक हो गई हैं, जबकि स्नातकोत्तर (पी.जी.) मैडिकल सीटें लगभग 31,000 से बढ़कर 74,000 से अधिक हो चुकी हैं। लाखों युवा डॉक्टरों के लिए ये केवल आंकड़े नहीं, बल्कि जीवन बदल देने वाले अवसर हैं।

यही नहीं, देश में आई.आई.टी. की संख्या 16 से बढ़कर 23, आई.आई.एम. की 13 से बढ़कर 21 और आई.आई.आई.टी. की संख्या 9 से बढ़कर 26 हो गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन.ई.पी.) ने शिक्षा को अधिक लचीला, बहुविषयक और नवाचार-आधारित बनाया है। सरकार ने यह भी समझा कि केवल डिग्री रोजगार की गारंटी नहीं है। इसलिए राष्ट्रीय अप्रैंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (एन.ए.पी.एस.) और राष्ट्रीय अप्रैंटिसशिप प्रशिक्षण योजना (एन.ए.टी.एस.) के माध्यम से लाखों युवाओं को उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण का अवसर मिला, जिससे शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कमहुई। इसी सोच का अगला महत्वपूर्ण चरण था ‘स्किल इंडिया मिशन’। वर्षों तक उद्योग जगत की शिकायत रही कि डिग्रीधारी युवाओं के पास आवश्यक कौशल का अभाव है। स्किल इंडिया ने इसी समस्या का समाधान किया। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और स्किल इंडिया की अन्य पहलों के माध्यम से 4 करोड़ से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिससे वे आधुनिक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार हुए हैं। शायद मोदी सरकार का सबसे बड़ा योगदान यह रहा है कि उसने युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनने के लिए प्रेरित किया।

वर्ष 2016 में जब ‘स्टार्टअप इंडिया’ की शुरुआत हुई, तब भारत का स्टार्टअप ईकोसिस्टम प्रारंभिक अवस्था में था। आज भारत में 1.8 लाख से अधिक डी.पी.आई.आई.टी. मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं और देश-दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप ईकोसिस्टम बन चुका है। इन स्टार्टअप्स ने 19 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं और 100 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियां खड़ी की हैं। आज भारत के युवा उद्यमी अंतरिक्ष जैसे अत्याधुनिक क्षेत्र में भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इसी प्रकार नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, ड्रोन, सैमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) जैसे क्षेत्रों को मोदी सरकार ने विशेष प्राथमिकता दी है। ‘इंडियाएआई मिशन’ जैसी पहलों के माध्यम से सरकार युवाओं को केवल आज की नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार कर रही है।

‘खेलो इंडिया कार्यक्रम’ ने जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और आधुनिक खेल अवसंरचना के माध्यम से भारत की खेल संस्कृति को नई दिशा दी है। हजारों युवा खिलाडिय़ों को आॢथक सहायता और विश्वस्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका परिणाम भारत के अब तक के सर्वश्रेष्ठ ओलिम्पिक, एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेल प्रदर्शन के रूप में सामने आया है। वर्ष 2036 ओलिम्पिक खेलों की मेजबानी की भारत की तैयारी देश के लाखों युवा खिलाडिय़ों के सपनों को नई उड़ान देने का राष्ट्रीय संकल्प है। राहुल गांधी का आरोप भले ही राजनीतिक सुॢखयां बटोर ले लेकिन तथ्य बिल्कुल अलग कहानी कहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की अधिकांश नीतियां इस लक्ष्य पर केंद्रित रही हैं कि भारत का युवा शिक्षित हो, कुशल-उद्यमी बने, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने और भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार हो। भारत के युवाओं के हितों को जितनी प्राथमिकता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी है, उतनी किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने आज तक नहीं दी।-तुहिन सिन्हा (राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी) 

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