भारतीय गणतंत्र को और मजबूत करना होगा!

Edited By Updated: 26 Jan, 2026 07:28 AM

the indian republic must be strengthened further

26 जनवरी, 1950 को गणतंत्र घोषित भारत आज अपने गणतंत्र के 77वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। अपनी इस लम्बी यात्रा में हमारे देश ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं और हर संकट में सुर्खरू होकर निकला है।

26 जनवरी, 1950 को गणतंत्र घोषित भारत आज अपने गणतंत्र के 77वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। अपनी इस लम्बी यात्रा में हमारे देश ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं और हर संकट में सुर्खरू होकर निकला है। आम तौर पर माना जाता है कि 80 वर्षों तक कोई देश लोकतंत्र को चला ले तो लोकतंत्र उसमें स्थापित हो जाता है। तुर्की ने लोकतांत्रिक शासन प्रणाली चलाई तो सही परंतु आठ दशक बाद अपना लोकतांत्रिक स्वरूप बाहरी तौर पर रखते हुए तानाशाही शासन के रूप में आगे आया। इसी तरह तुर्की के अलावा 1920 या 1930 के दशक में स्वतंत्र होने वाले अनेक देश अपनी लोकतांत्रिक शासन प्रणाली को गंवा बैठे। यहां प्रश्न उत्पन्न होता है कि भारत में ऐसा क्या है जिसकी बदौलत हमारा लोकतंत्र चलता रहा है हालांकि हमारे देश को स्वतंत्रता मिलने के समय हमारे देश में पुरुष मात्र 12 प्रतिशत और 8 प्रतिशत महिलाएं शिक्षित थीं तथा देश अॢथक असमानता व जातिवाद के आधार पर विभाजित था।

सबसे पहले तो बुनियादी बात यह है कि दुनिया में भारत पहला देश है जहां सिंधु घाटी सभ्यता (2600 बी.सी.) के दौर में भी लोकतांत्रिक शासन प्रणाली चल रही थी। हमारे देश में लोकतंत्र की अवधारणा वैदिक काल में भी व्याप्त थी परंतु हमने 1500 बी.सी. में इस अवधारणा को गंवा दिया था। बाद में स्वतंत्र भारत का संविधान बना, जो दुनिया में सबसे लम्बा संविधान है। इसका कारण यह है कि इसके अंतर्गत राज्यों तथा केंद्र सरकार, न्यायपालिका और कार्यपालिका आदि के आपसी सम्बन्धों को अत्यंत सुविचारित और स्पष्टत: सुपरिभाषित किया गया है। 
1947 में जब हमारे देश को स्वतंत्रता मिली, उस समय हमारा देश उन 30 देशों में एक था जिन्होंने महिलाओं को वोट का अधिकार दिया जबकि फ्रांस तथा इटली में भी ऐसा नहीं था। यूरोपीय संघ में कई देश ऐसे थे जिन्होंने महिलाओं की शिक्षा और सम्पत्ति के आधार पर उन्हें मतदान का अधिकार दिया था। 

बिना किसी भेदभाव के एक समान अधिकार देने की दूरदॢशता आज हमारी सबसे बड़ी विशेषता है। ‘युनिवर्सल फ्रैंचाइज’ अगर एक नम्बर पर है तो 2 नम्बर पर आती है धर्म निरपेक्षता और तीसरी विशेषता, सारी दुनिया के किसी देश के इतिहास में नहीं मिलती कि 520 रियासतों को चाहे वे छोटी थीं या बड़ी या कमजोर थीं या मजबूत, सब को एक सूत्र में पिरो कर भारत में उनका विलय करवाया गया। अमरीका में शुरू में 13 राज्य थे, जो बढ़ते-बढ़ते अब 50 हो गए हैं। यूरोपीय संघ में भी 7 राज्य थे जो अब बढ़ते-बढ़ते 27 तक हो गए हैं परंतु भारत की भांति 520 रियासतें तो किसी की भी नहीं थीं। इन सब में अलग-अलग भाषा और रीति-रिवाजों का पालन किया जाता था और विविधता के बावजूद सम्पूर्ण एकता बनी। इन सबको इकट्ठा करना हमारे संविधान निर्माताओं तथा हमारे शुरुआती नेताओं का सबसे महत्वपूर्ण काम था जिसे तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सफलता पूर्वक निभाया। सरदार पटेल ने 1948 में बम्बई (वर्तमान मुम्बई) में एक भाषण दिया था, जो उन्होंने एक पत्र के रूप में पंडित नेहरू को 30 अक्तूबर, 1948 को भेजा था। इसमें उन्होंने लिखा था :
‘‘मैं उम्र के ऐसे पड़ाव पर पहुंच चुका हूं जहां मुझे आराम करने का अधिकार है लेकिन मेरा हृदय उन कामों को करने के लिए बेचैन है।’’ 

‘‘आप जानते हैं कि इस एक वर्ष के दौरान भारत किस कदर कठिनाइयों से गुजरा है। मैं डरता हूं कि कहीं हमसे कोई चूक न हो जाए जो भारत के लिए संकटपूर्ण सिद्ध हो। जब मैंने विभाजन को स्वीकार किया मेरा दिल पीड़ा से भरा हुआ था।’’ ‘‘मैं इसके पक्ष में नहीं था लेकिन हमने विभाजन के परिणामों के बारे में सोचने के बाद खुशी से इसे स्वीकार किया। यदि हमने विभाजन स्वीकार न किया होता तो इसके परिणाम उससे भी कहीं अधिक बुरे हो सकते थे।’’ मुम्बई में 1948 में दिए अपने इस भाषण में उन्होंने कहा था, ‘‘मैं अपने नागरिकों को यही सलाह दूंगा कि प्रांतीय अलगाववाद को त्याग दें, अपनी जुबान पर लगाम रखें। अगर हम इसी तरह बोलते रहे, जहर भरते रहे तो भारत बर्बाद हो जाएगा। यह ऐसा होगा जैसे लक्ष्मी हमारे माथे पर तिलक लगाने आए और हम उसे धो दें।’’ ‘‘हम गुलामी में एक-दूसरे से प्यार करते थे, बंधन में एकजुट थे तो अब जब हम आजाद हैं तो क्यों लड़ें? हमने अतीत में विभाजन के कारण आजादी खो दी थी, अब आपसी प्रेम तथा स्नेह ही भारत को एकजुट और मजबूत बना सकता है। हमने इतनी पीड़ा सही और हम सब इकट्ठे रहने के कारण ही इसमें सफलता प्राप्त कर सके।’’ आज अपने गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर अपने पाठकों को बधाई देते हुए हम आशा करते हैं कि आने वाले वर्षों में हमारा देश और मजबूत होकर अपनी भूमिका सफलतापूर्वक निभा सकेगा। 

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